नई दिल्ली. खेल की दुनिया से बिहार का कनेक्शन देश के अन्य राज्यों के मुकाबले कम है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में बिहार की एक बेटी ने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर खेलों की दुनिया में बिहार का भी मान बढ़ाया है. जी हां, निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली श्रेयसी सिंह, बिहार के जमुई की हैं. वह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं. वही दिग्विजय सिंह, जिन्हें बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 2009 के लोकसभा चुनाव में जनता दल (युनाइटेड) से टिकट देने से इनकार कर दिया था. लेकिन जनता के बीच लोकप्रिय दिग्विजय सिंह ने बांका लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर नीतीश कुमार को धता बता दिया था. दिग्विजय सिंह राजनीति के अलावा खेल की दुनिया में भी सक्रिय थे. वे नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रह चुके थे. आज उन्हीं दिग्विजय सिंह की बेटी ने निशानेबाजी में एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर अपने देश और बिहार का नाम रोशन किया है.

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कॉमनवेल्थ खेलों की बैठक में गए थे लंदन, वहीं हुई मृत्यु
तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा से सांसद रहे दिग्विजय सिंह केंद्र में कई सरकारों में मंत्री पद पर रहे थे. चंद्रशेखर के नेतृत्व में वर्ष 1991 में बनी सरकार में भी वे मंत्री रहे. वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी राजग सरकार में वे विदेश राज्यमंत्री थे. पूर्व में समता पार्टी और बाद में जदयू के वरिष्ठ नेता जॉर्ज फर्नांडीस के बेहद करीबी रहे दिग्विजय सिंह का वर्ष 2010 में दिमाग की नस फटने के कारण लंदन में निधन हो गया था. यह महज संयोग ही है कि आज उनकी बेटी ने जिस कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है, दिग्विजय सिंह निधन से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन समिति की बैठक में भाग लेने ही लंदन गए हुए थे. इसी दौरान लंदन में उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 10 जून 2010 को उनकी मृत्यु हो गई.

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जीवन के आखिरी दिनों में नीतीश कुमार से रही अनबन
दिग्विजय सिंह छात्र जीवन से ही राजनीति में दिलचस्पी लेने लगे थे. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल करने वाले दिग्विजय सिंह, जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रह चुके थे. 1990 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए दिग्विजय सिंह को उनकी राजनीतिक व प्रशासनिक क्षमता देखते हुए केंद्र में रेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद संभालने का मौका मिला था. इस दौरान वे बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ रहे. लेकिन 2010 में निधन से करीब एक साल पहले से नीतीश कुमार और उनके बीच सियासी तनातनी रहने लगी. यही वजह था कि 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडीस को मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट और दिग्विजय सिंह को बांका सीट से जदयू का टिकट देने से इनकार कर दिया. लेकिन जनता के प्रिय नेता रहे दिग्विजय ने हार नहीं मानी, और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बांका से जीत दर्ज की थी.