नई दिल्ली. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले साल जुलाई में महागठबंधन से रिश्ता तोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए का हाथ थामा था. नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस का साथ छोड़कर एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी भाजपा के साथ सत्ता संभाली. जदयू के कई नेताओं का आरोप है कि इसके बाद से ही पूरा प्रदेश सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहा है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार जदयू के इस आरोप की गवाही प्रदेश में हुए सांप्रदायिक दंगों के आंकड़े भी देते हैं. दरअसल, जुलाई 2017 से लेकर अब तक 9 महीनों में ही बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 200 घटनाएं हुई हैं. इनमें से 64 घटनाएं तो इस साल के पिछले तीन महीनों की ही हैं. अखबार के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में बिहार में हुए सांप्रदायिक हिंसा के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो साल दर साल इनमें वृद्धि देखी जा रही है. 2012 में प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की 50 घटनाएं, 2013 में 112, 2014 में 110, 2015 में 155, 2016 में 230 और वर्ष 2017 में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा की 270 घटनाएं हुई हैं.

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सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी का आंकड़ा वर्तमान में क्यों चिंताजनक है, यह इससे समझा जा सकता है कि इस साल हुई 64 घटनाओं में से 30 घटनाएं मार्च में हुई हैं. वहीं जनवरी में इनकी संख्या 21 थी तो फरवरी में 13. मार्च के महीने में ज्यादातर घटनाएं मुस्लिम इलाकों में धार्मिक जुलूस निकालने के दौरान हुई हैं. बिहार में इस साल हुई सांप्रदायिक घटनाओं में तकरीबन आधा दर्जन से ज्यादा जिले प्रभावित हुए हैं. अररिया में लोकसभा उपचुनाव के बाद कथित तौर पर भारत-विरोधी नारे लगाने वाले वीडियो वायरल होने की घटना के बाद भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, शेखपुरा, नवादा और नालंदा में हिंसा की घटनाएं हुईं. केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियों की माने तो औरंगाबाद, नालंदा और शेखपुरा की घटनाएं रामनवमी के अवसर पर जुलूस निकालने के दौरान घटित हुई हैं.

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बिहार में राजग शासन में हिंसा
वर्ष 2010 में एनडीए के शासनकाल में सांप्रदायिक हिंसा की 50 घटनाएं हुईं. वहीं वर्ष 2011 में इन घटनाओं की संख्या 25 थी. 2012 में यह संख्या 50 पर पहुंची तो 2013 में आंकड़ा 112 पर पहुंच गया. हालांकि इसी साल जून में नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए. 2014 में जदयू के शासनकाल में राज्य में 110 घटनाएं हुईं. 2015 में जब नीतीश कुमार, राजद व कांग्रेस के महागठबंधन के साथ सत्ता में थे तो सांप्रदायिक हिंसा की 155 घटनाएं दर्ज की गई थी. 2016 में महागठबंधन के शासन के दौरान राज्य में ऐसी 230 घटनाएं हुईं. वहीं जुलाई 2017 में जब नीतीश कुमार वापस एनडीए में लौट आए तब हिंसा की 270 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं. बिहार पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस साल मार्च में राज्यभर में हिंसा की जितनी भी घटनाएं हुई हैं, उनमें पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. पुलिस के अनुसार दशहरा और रामनवमी पर निकाले जाने वाले जुलूस हमेशा से संवेदनशील रहे हैं. लेकिन इस बार के रामनवमी जुलूसों में एक बात खास तौर पर दर्ज की गई कि भीड़ में शामिल लोगों के हाथों में ‘नए तलवार’ थे. यह पुलिस के लिए चौंकाने वाला तथ्य है. बिहार पुलिस इस बात की जांच भी कर रही है कि ये तलवार किसी विशेष समूह द्वारा तो नहीं पहुंचाए गए? बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘पुलिस ने हिंसा की घटनाओं पर काबू पा लिया, लेकिन हम अभी तक इसका विश्लेषण नहीं कर पाए हैं. हम हाल में हुई हिंसा के सभी मामलों की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि कहीं इनका कोई राजनीतिक कनेक्शन तो नहीं है.’

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भाजपा और जदयू, सिर्फ बयानबाजी तक सिमटे
बिहार में हुईं हिंसक घटनाओं को लेकर भाजपा और जदयू, दोनों ही दल बयानबाजी तक सिमटे हैं. जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी. त्यागी ने इंडियन एक्सप्रेस को कहा, ‘रामनवमी को लेकर पहले भी सांप्रदायिक हिंसा की वारदातें हुई हैं. लेकिन इस बार की घटनाओं में शामिल आपराधिक तत्वों से शीर्ष स्तर पर निपटना पड़ेगा. राज्य सरकार सख्ती के साथ ऐसे तत्वों से निपटेगी.’ वहीं प्रदेश में हिंसक वारदातों के लिए भाजपा के प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं, ‘रामनवमी के मौके पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है. लेकिन पुलिस को इन घटनाओं में राजद की संलिप्तता की भी जांच करनी चाहिए. पुलिस ने कई मामलों में राजद और कांग्रेस के नेताओं पर केस भी दर्ज किए हैं. लेकिन जहां तक हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी की बात है, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.’

बिहार में मार्च के महीने में हुईं हिंसक घटनाएं
अररिया – 14 मार्च को लोकसभा उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सरफराज आलम की जीत के बाद कथित तौर पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें राष्ट्र-विरोधी नारे लगाने की बात थी. मामले में तीन युवक गिरफ्तार किए गए. आरोपी युवकों ने बाद में ओरिजिनल वीडियो भी दिखाया जिसमें राजद समर्थित नारे लगाए गए थे. पुलिस ने इस वीडियो को फोरेंसिक टेस्ट के लिए भेजा है.

भागलपुर 18 मार्च को मुस्लिम बहुल नाथनगर इलाके में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत की मोटरसाइकिल रैली के दौरान दो समुदायों के बीच आपस में पथराव और मारपीट की घटना हुई. यह मोटरसाइकिल जुलूस हिन्दू नववर्ष के अवसर पर निकाला गया था. पुलिस ने अर्जित शाश्वत के खिलाफ मामला दर्ज किया, हालांकि बीते दिनों अर्जित ने कोर्ट में समर्पण कर दिया.

मुंगेर – 25 मार्च को रेलवे की जमीन पर हनुमान की मूर्ति स्थापना को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ. हालांकि मामला बढ़ने के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया. मामले में 12 लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.

औरंगाबाद 26 मार्च को रामनवमी की तैयारियों को लेकर मोटरसाइकिल जुलूस निकाला गया. जुलूस के नवाडीह पहुंचने के बाद आरोप है कि लोगों पर पथराव किया गया. इसके बाद भड़की हिंसा में कई दुकानें जला दी गईं. इसके अगले ही दिन रामनवमी को लेकर 10 हजार लोग इकट्ठा हो गए. इसके बाद दो समुदायों के बीच विवाद हुआ और करीब घंटेभर तक पत्थरबाजी हुई. पुलिस ने मामले में 78 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की. आरोपियों में भाजपा प्रवक्ता उज्ज्वल कुमार, भाजपा नेता अनिल सिंह और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य दीपक कुमार का नाम भी शामिल है.

समस्तीपुर – 26 मार्च को ही रामनवमी जुलूस को लेकर गुदरी बाजार के पास विवाद हुआ. इसके बाद सोशल मीडिया पर फैलाए गए संदेशों से हिंसा फैली. एक समुदाय के इलाके में घरों पर पत्थर फेंके गए. पुलिस ने मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जबकि 54 के खिलाफ मामला दर्ज किया. आरोपियों में राज्यस्तर का एक भाजपा नेता भी शामिल है.

नालंदा – 28 मार्च को तयशुदा रास्ते से रामनवमी जुलूस न निकालने को लेकर शुरू हुए विवाद ने उग्र रूप अख्तियार कर लिया. इसके बाद पथराव और मारपीट की घटनाएं हुईं. इस मामले में पुलिस ने बजरंग दल के नालंदा जिला समन्वयक धीरज कुमार सहित 36 लोगों को गिरफ्तार किया, वहीं 74 के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया.

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नवादा 28 मार्च को राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर भगवान हनुमान की खंडित मूर्ति मिलने के बाद हिंसा की घटनाएं हुईं. उग्र लोगों ने वाहनों पर पथराव किया और एक बारात पार्टी को भी निशाना बनाया. इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया.

जमुई – 28 मार्च की रात पुलिस के मुस्लिम बहुल इलाके से मूर्ति विसर्जन जुलूस नहीं निकालने देने पर विवाद फैला. इसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए. इस मामले में भी अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

मुजफ्फरपुर और बांका – 25 मार्च को मुजफ्फरपुर और 27 मार्च को बांका में रामनवमी जुलूस को लेकर विवाद हुआ. बांका में पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, वहीं मुजफ्फरपुर में एफआईआर के बाद भी अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.