नई दिल्ली: करीब 9 लाख करोड़ रुपए के एनपीए को लेकर सत्‍ता पक्ष बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए नजर आते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की इससे निपटने की नीति के चलते ही लगभग रकम वापस आ चुकी है. ये बड़ा दावा सरकार के एक बड़े अधिकारी ने किया है. सरकार ने बुधवार को कहा कि ऋणशोधन व दिवाला संहिता (आईबीसी)-2016 बनाए जाने से बैंकों के फंसे हुए नौ लाख करोड़ रुपए के कर्ज के आधे से कम की रकम प्रणाली में वापस आ चुकी है. उद्योग संगठन सीआईआई की ओर से करवाए गए एक सम्मेलन में कंपनी मामलों के मंत्रालय में सचिव इंजेती श्रीनिवास ने यह जानकारी दी. इससे एक दिन पहले उनकी अध्यक्षता में ऋणशोधन विधि समिति (आईएलसी) की रिपोर्ट जारी हुई है.

व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा
श्रीनिवास ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने आईबीसी के तहत समाधान के लिए पिछले साल जून में 12 खातों का जिक्र किया था, जिनमें कुल फंसे हुए कर्ज (एनपीए) की 25 फीसदी थी. उन्होंने कहा कि इन मामलों में अच्छे परिणाम आए हैं, जिससे व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी. अंतिम निर्णायक राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) इस व्यवस्था का एक प्रमुख घटक है. उन्होंने कहा, “अगर पांच-छह अच्छे नतीजे मिल रहे हैं तो इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा.”

तीन माह पहले ये कहा था वित्‍त मंत्री ने
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जनवरी में कहा था कि बैंकों के बैड लोन के मसले का समाधान करने की दिशा में सरकार सभी संभव संसाधनों को जुटा रही है.वित्त मंत्री ने कहा था, जहां तक बैंकिंग सिस्टम का सवाल है, हम अपने सभी संसाधनों को इसमें (एनपीए मद) में लगाने की कोशिश कर रहे हैं. उद्योग की ओर से बैंक को भुगतान नहीं किया जा रहा है इसलिए यह बेलआउट यानी आर्थिक मदद जो हम करदाताओं के पैसे से कर रहे हैं वह आदर्श स्थिति नहीं है.”

यूपीए सरकार में बिना सोचे-समझे कर्ज दिए गए
वित्त मंत्री ने इस बात का जिक्र किया था कि जब निजी निवेश निराशाजनक था उस समय सार्वजनिक निवेश की बदौलत देश का विकास दर लगातार सात फीसदी रही. अर्थव्यवस्था की दशा को लेकर राज्यसभा में कुछ देर बहस में हिस्सा लेते हुए जेटली ने कहा था कि यूपीए सरकार में तेजी के दौरान बिना सोचे-समझे बैंको की ओर से कर्ज प्रदान किए गए, जिसके चलते बैंकिग सिस्टम में भारी परिमाण में एनपीए की स्थिति पैदा हुई.

2.12 लाख करोड़ का रिकैपिटलाइजेशन किया था मंजूर
सरकार की ओर से अक्टूबर में सरकारी क्षेत्र के बैंकों के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपए के रिकैपिटलाइजेशन को मंजूरी देने का जिक्र करते हुए वित्तमंत्री ने कहा था कि इसका उद्देश्य यह है कि आर्थिक विकास को गति प्रदान करने की दिशा में बैंकों की क्षमता एनपीए के कारण प्रभावित न हो, क्योंकि सभी बैंकों का कुल एनपीए 7.5 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया है, जो कि एक हैरान करने वाला स्तर है. (इनपुट एजेंसी)