नोएडा. रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन Credai ने मंगलवार को माना है कि यूपी के सीएम द्वारा तय किए गए टारगेट से अभी वो दूर हैं. योगी आदित्यनाथ ने बिल्डरों को निर्देश दिया था कि वे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दिसंबर के अंत तक खरीदारों को 50 हजार फ्लैट डिलिवर करें. Credai ने हालांकि भरोसा दिया है कि 2018 में वह डिलिवरी प्रक्रिया को गति दे सकेंगे क्योंकि इंडस्ट्री जीएसटी और रेरा के प्रोसेस में सेटल हो चुकी होगी.

रियल एस्टेट कंपनियों की तरफ से ये सफाई सीएम द्वारा गठित तीन मंत्रियों की उस सिफारिश के बाद आई है जिसमें उन्होंने 5 हजार फ्लैट्स को डिलिवर न करने के लिए जिम्मेदार 8 डिवेलपर्स की गिरफ्तारी की सिफारिश की थी. इस सिलसिले में गौतम बुद्ध नगर के SSP लव कुमार ने सोमवार को ही 8 बिल्डरों की गिरफ्तारी का आदेश दिया था. हालांकि पुलिस ने इन बिल्डरों के नाम जारी करने से इनकार कर दिया है.

पुलिस ने बताया कि इन बिल्डरों ने अपने ग्राहकों को 5000 फ्लैट देने से मना कर दिया था. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सितंबर में पुलिस ने इन 6 बिल्डरों के खिलाफ 13 एफआईआर दर्ज की थी. इनमें आम्रपाली, सुपरटेक, एल्पाइन रियलटेक, प्रोवियु ग्रुप, टुडे होम्स और जेएनसी कन्सट्रक्शन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इन बिल्डरों पर धारा 406 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

इस साल अगस्त में योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनी तीन मंत्रियों की कमेटी ने ये फैसला लिया. इसमें शहरी आवास मंत्री सुरेश खन्ना, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश महाना और गन्ना चीनी मिल विकास प्रभारी सुरेश राणा सदस्य थे. कमेटी का कहना है कि 2017 खत्म होते-होते नोएडा में 11,000 फ्लैट डिलीवर किए जाएंगे.