नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने कोकाकोला संयंत्र के दुष्प्रभावों पर बनी फिल्म को प्रतिबंधित करने को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की गुरुवार को खिंचाई की. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीबीएफसी से पूछा, यदि फिल्म निर्माता कह रहे हों कि उनकी फिल्म अवमानना कर सकती है, पर वह सत्य है तो सेंसर बोर्ड उसे प्रदर्शित करने पर कैसे रोक लगा सकता है. न्यायालय ने पूछा कि क्या आप मीडिया को किसी विरोध प्रदर्शन को कवर करने से रोकेंगे.

न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने ये सवाल फिल्म निर्माता झरना झावेरी की अपील पर सुनवाई के दौरान किए. झावेरी ने उत्तरप्रदेश में स्थित कोकाकोला के दो संयंत्रों पर डॉक्यूमेंट्री बनायी है जिसे सीबीएफसी ने भटकाने वाला और राजनीति से प्रेरित बताते हुए रोक दिया है.

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सेंसर बोर्ड के इस दलील पर कि इस फिल्म से अमेरिका के साथ भारत के संबंध प्रभावित हो सकते हैं, न्यायालय ने कहा कि क्या इस आधार पर लोगों को 1962 के भारत-चीन युद्ध के बारे में बातें करने से रोका जा सकता है कि इससे चीन के साथ संबंध खराब होंगे. न्यायालय ने कहा कि यदि फिल्म अपमानजनक होगी तो निर्माता को अवमानना के मामले में घसीटा जाता है न कि फिल्म रोक दी जाती है.