नई दिल्ली। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के अगस्त के आंकड़े गुरुवार को जारी किए गए, जिसमें फैक्टरी आउटपुट में पिछले साल के समान माह की तुलना में 4.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. यह पिछले 9 महीने का उच्च स्तर है. पिछला उच्च स्तर नवंबर 2016 में रहा था जब औद्योगिक उत्पादन 5.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था. इस बार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में बढ़ोतरी के पीछे सबसे ज्यादा योगदान खनन और विद्युत क्षेत्र में आई मजबूती का रहा.

पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि भारत की औद्योगिक वृद्धि और मुद्रास्फीति में तेजी देखी जा सकती है. इसकी वजह जीएसटी का नकारात्मक प्रभाव कम होना और जिंसों की कीमत में वृद्धि होना है. वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली की रपट के अनुसार अगस्त का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक बेहतर रह सकता है क्योंकि माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की वजह से पैदा हुआ नकारात्मक प्रभाव अब खत्म हो रहा है. साथ ही सितंबर में निर्यात वृद्धि के भी मजबूत रहने की उम्मीद है.

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मार्गन स्टेनली के अनुसार सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) बढ़कर 3.8% रहने की संभावना है और यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4% मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है. जबकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) के भी बढ़कर 3.4% होने की संभावना है जो अगस्त में 3.2% थी. इसके पीछे अहम कारण पेट्रोलियम की कीमत में वृद्धि होना है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत की खुदरा स्फीति अगस्त में पांच महीने के उच्च स्तर यानी 3.36% थी. इसका कारण सब्जियों और फलों में कीमत में वृद्धि होना था. मुद्रास्फीति में तेजी के रुख को देखते हुए मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि ‘मुद्रास्फीति में इस बढ़त’ का मतलब होगा कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखेगा.

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने 4 अक्तूबर को अपनी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा था जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान को घटाकर 6.7% कर दिया गया.