मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे वित्तीय फैसले लिए है जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है. नोटबंदी हो या फिर जीएसटी सभी से देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. मोदी सरकार अब बैंकिंग सेक्टर में भी नया कानून लाने जा रही है जिसका असर न सिर्फ बैंकों पर पड़ेगा बल्कि सेविंग एकाउंट रखने वाले ग्राहक भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे.

कानून क्या है?
मोदी सरकार एफआरडीआई बिल लाने की तैयारी कर रही हैं. आने वाले शीतकालीन सत्र में यह बिल पेश किया जाएगा और उम्मीद है कि यह पास भी हो जाएगा. इसे मॉनसून सत्र के दौरान जॉइंट पार्लियामेंट्री समिति के पास भेजा गया गया था जिन्होंने नए सुझाव दिए थे. सुझावों के बाद अब सरकार दुबारा इस बिल को पेश करेगी.

इस कानून के आने के बाद अभी चल रहे डिपाजिट इन्शोरेन्स एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन को खत्म कर दिया जाएगा. इसी कानून में एक अहम प्रावधान यह है कि अगर कोई बैंक सिक घोषित होती है तो उसे बैंक में एकाउंट रखने वाले ग्राहकों को 1 लाख तक डिपॉजिट वापस करना होगा.

मगर नए बिल के तहत वित्त मंत्रालय के अधीन एक नए रेगुलेशन कॉरपोरेशन बनाया जाएगा. फिलहाल किसी भी बैंक के दिवालिया हो जाने के बाद उसे आर्थिक संकट से बाहर निकलने का काम रिज़र्व बैंक करती है मगर अब नया कॉरपोरेशन यह काम करेगा.

फिलहाल बैंक सिक होने के बाद केंद्र सरकार उसे दुबारा खड़ा करने के लिए बेलआउट पैकेज देती है. मगर नए कानून के पास होने के बाद ऐसा नहीं होगा. रेगुलेशन कॉरपोरेशन यह तय करेगी कि डिपॉजिट पैसे में से ग्राहक कितने पैसे निकाल सकता है. नए कानून आने के बाद केंद्र सरकार तय करेगी की संकट के समय ग्राहकों को कितने पैसे निकालने की छूट दी जाए. उनके बचत की कितनी रकम के जरिए बैंकों के गंदे कर्ज को खत्म करने का काम किया जाए.