नई दिल्लीः ठीक 12 महीने बाद देश में होने वाले आम चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगी? क्या वह सरकार पूर्ण बहुमत वाली सरकार होगी? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर देश की बागडोर संभालेंगे? अब ऐसे सवाल देश के मीडिया ही नहीं दुनिया की एक सबसे बड़ी बाजार सर्वे एजेंसी मॉर्गन स्टेलनी ने भी उठाना शुरू कर दिया है. ब्लूमबर्ग ने मॉर्गन स्टेलनी की इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सवालों के फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिख रहे हैं. इस कारण देश के शेयर बाजार में आने वाले समय में अनिश्चितता रहेगी.

मॉर्गन स्टेलनी इंडिया को. के एनालसिस्ट रिधम देसाई और शीला राठी ने 16 अप्रैल को एक रिपोर्ट में कहा है कि ठीक 12 महीने बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव होंगे और आने वाले समय में बाजार चुनाव के संभावित नतीजों को आंकने लगेगा. इन दोनों ने ‘द बिगेस्ट इंवेस्टर कंसर्नः ए विक कोलिजन गर्नमेंट, वन लोथ टु क्विक ऐडमिनिस्ट्रेटिव डिसिजन, इंक्लूडिंग पॉलिटिक अनसर्टेनिटी’ शीर्षक से यह रिपोर्ट लिखी है.

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2014 में भारी जनादेश मिला था
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पिछले तीन दशक का सबसे बड़ा जनादेश मिला था. लेकिन करीब दो अरब डॉलर की बैंक धोखधड़ी से जुड़े मामलों में दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने में मोदी सरकार के विफल रहने और हाल ही में उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू के कठुआ गैंगरेप कांड के बाद जनता के सड़क पर उतरने को देखते हुए मोदी के समर्थकों की संख्या घटने की आशंका घर करने लगी है.

इसका असर देश के शेयर बाजार में देखने को मिलने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक बीते वर्ष में बीएसई के सेंसेक्स और एनएसई के निफ्टी में करीब 28 फीसदी का उछाल आया था, लेकिन इस साल करीब साढ़े तीन माह बीत जाने के बाद भी बाजार में कुछ खास बदलाव नहीं आया है.

देसाई और राठी ने लिखा है कि शेयर बाजार इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं है कि 2019 में देश में एक बहुमत वाली सरकार बनेगी. अगर यह अनिश्चितता बढ़ती है तो आने वाले समय में शेयर बाजार में तेजी पर विराम लग सकता है. ऐसे में मॉर्गन स्टेलनी ने निवेशकों के सलाह दी है कि वे संभलकर आगे बढ़ें और अपने पोर्टफोलियो में हर तरह के शेयर रखें, जिससे जोखिम को कम किया जा सके.