नई दिल्‍ली: रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति के अनुसार अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि दर सुधर रही है और उत्पादन का अंतर घट रहा है. समिति ने रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है और यह पहले की तरह 5.75 प्रतिशत ही रहेगा.

नए वित्त वर्ष 2018-19 की यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा है. मुद्रास्फीति की नरमी के बाद रिजर्व बैंक पर दबाव था कि वह नीतिगत ब्याज दर में कटौती करे ताकि कर्ज सस्ता हो और बाजार तथा उद्योग धंधों को प्रोत्साहन मिले. लेकिन अर्थव्‍यवस्‍था की बेहतर हालत को देखते हुए फिलहाल इसे यथावत रखने का फैसला किया गया है.

रेपो दर ( नीतिगत दर) वह दर है जिस पर आरबीआई व्यावसायिक बैंकों को उनकी फौरी जरूरत के लिए नकद राशि उधार देता है. यह दर कम होने से बैंकों के धन की लागत कम हो सकती है और वे कर्ज सस्ता करने की स्थिति में हो सकते हैं. उद्योग जगत ने इसमें कमी की मांग की थी.

असर: कर्ज की दरें सस्‍ती होने की उम्‍मीद नहीं
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के बाद इसकी संभावना कम ही है कि व्‍यावसायिक बैंक कर्ज के लिए ब्‍याज दर में कटौती करेंगे. आम लोगों के ऊपर कर्ज के बोझ में कमी की फिलहाल उम्‍मीद नहीं दिखती.