रायपुर/दंतेवाड़ा. नक्सलियों के जेल से फरार होने की कोशिश सफल नहीं हो पाई और फरार होने के बाद भी उन्हें दबोच लिया गया. ये वाकया छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा जिला जेल में हुआ है. पुलिसकर्मियों की सक्रियता के चलते ये भागने में कामयाब नहीं हो सके और जल्दी ही इन्हें दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया. इसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली. जेल प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि की है. बता दें कि एक सप्ताह पहले सुकमा में नक्सलियों द्वारा 13 मार्च को किए गए आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के नौ जवान शहीद हो गए थे.

समय रहते दोबारा दबोचा
शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिला जेल से शुक्रवार को दिनदहाड़े चार कैदी फरार हो गए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने समय रहते उन्हें दोबारा दबोच लिया. जिला पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने शनिवार को ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ये चारों ही नक्सली संगीन जुर्म की सजा काट रहे थे. इनके भागने की खबर लगते ही पूरा पुलिस विभाग सक्रिय हो गया.

दंतेवाड़ा जेल से भाग थे 300 कैदी 
दंतेवाड़ा जेल की सुरक्षा में सेंध की ये कोई नई घटना नहीं है. इससे पहले 16 दिसंबर 2007 को भी 300 कैदी जेल से भाग गए थे. उस समय 150 नक्सलियों और उनके समर्थकों सहित 300 से अधिक कैदी जेल कर्मियों पर हमला कर फरार हो गए थे. इस मामले में देश भर में जेल प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी.

दोबारा जेल सुरक्षा की पोल खुली
पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े किए गए थे. इसके बाद भी  दोबारा चार कैदियों के भागने से जेल में सुरक्षा की पोल खुल गई है. हालांकि, कैदियों के भागने के समय की जानकारी नहीं मिल पाई है.

बता दें कि नक्सली प्रभावित छत्तीसगढ़ के जेलों में कई दुर्दांत नक्सली सलाखों के पीछे हैं और वे यहां से भागने की कोशिश कई बार करते रहते हैं, ऐसे में जेल सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था से उनके मंसूबों पर पानी फेरा जा सकता है.

2 मार्च को मुठभेड़ में मारे गए थे 10 नक्सली
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा में जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बीते पुलिस के साथ मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए थे. तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित वेंकटपुरम गांव के समीप जंगलों में यह गोलीबारी हुई.दो राज्यों की पुलिस द्वारा तदालापुट्टा-पुजारीकामकेडु इलाके में चलाए गए संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को तगड़ा आघात पहुंचा.

गुप्त सूचना के आधार पर अभियान शुरू किया था 
मुठभेड़ उस वक्त हुई, जब ग्रेहाउंड्स कर्मियों के साथ पुलिस ने जंगलों में नक्सलियों के मौजूद होने की गुप्त सूचना के आधार पर अभियान शुरू किया था. उन्होंने नक्सलियों को घेर लिया और उनसे आत्मसमर्पण करने को कहा, जवाब में नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और पुलिस को जवाबी कार्रवाई करने को मजबूर कर दिया. कुछ नक्सली भागने में कामयाब रहे थे. ग्रेहाउंड्स के सिपाही सुशील कुमार इस गोलीबारी में शहीद हो गए थेे. तीन अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए जिन्हें हवाईजहाज से भद्राचलम  भेजा गया था. । (इनपुट- एजेंसी)