मल्लिका-ए-गज़ल के नाम से मशहूर बेगम अख्तर का आज 103 वां जन्मदिन है. 7 अक्टूबर 1914 को फ़ैजाबाद में जन्मीं बेगम अख्तर को गजल, दादरा और ठुमरी में महारत हासिल थी. बेगम ने संगीत की दुनिया में अपना कदम लखनऊ से किया था. बेगम अख्तर की मां मुश्तारी देवी एक तवायफ थीं. जिन्होंने अपनी बेटी में छिपे प्रतिभा को पहचान लिया था.

बेगम की आवाज को जो भी एक बार सुन लेता वो उनका दीवाना हो जाता था. बेगम अख़्तर को कलकत्ता की ईस्ट इंडिया कंपनी में अभिनय करने का मौका मिला. बतौर अभिनेत्री बेगम अख़्तर ने ‘एक दिन का बादशाह’ से अपने फ़िल्मी करियर की शुरूआत की लेकिन फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी.

कुछ समय के बाद वह लखनऊ चली गई जहां उनकी मुलाकात महान निर्माता -निर्देशक महबूब खान से हुई जो बेगम अख़्तर की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुए और उन्हें मुंबई आने का न्योता दिया. साल 1942 में महबूब खान की फ़िल्म ‘रोटी’ में बेगम अख़्तर ने अभिनय करने के साथ ही गाने भी गाए.

बेगम अख्तर ने बेरिस्टर इशतियाक अहमद अब्बासी से शादी की थी. बेगम अख्तर की आवाज का जादू हिंदी फिल्मों में भी रहा उन्होंने करीब 9 फिल्मों में अपनी आवाज जादू बिखेरा.

अपनी बेहतरीन गायिकी के लिए बेगम अख्तर को वोकल संगीत के लिए दिया जाने वाला संगीत नाटक अकेडमी अवॉर्ड दिया जा चुका है.

इतना ही नहीं बेगम अख्तर को भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित सम्मान पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है. फेमस गजल ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया…आज भी सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. हमरी अटरिया पे आजा ओ संवरिया… देखा-देखी तनिक होई जाए’ ठुमरी को बेग़म अख्तर ने अपनी आवाज दी थी.