कहते है फिल्में समाज का आईना होती है. इसलिए समाज में जो भी घटना घटती है उसे फिल्ममेकर्स बनाने से नहीं चूकते. इस समय पूरे देश में तीन तलाक का मुद्दा छाया हुआ. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक पीठ द्वारा तीन तलाक के मामले में सुनवाई पूरी कर ली गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया है. लेकिन इस मुद्दे पर आज से 35 साल पहले ही डायरेक्टर बी.आर चोपड़ा ने एक फिल्म बनाई, जिसने रिलीज के साथ ही सनसनी मचा दी थी. इस फिल्म का नाम था ‘निकाह.’ बताया जाता है कि उस वक़्त इस फिल्म पर 30 से ज्यादा केस दर्ज हुए थे.

डायरेक्टर बी.आर चोपड़ा की इस फिल्म में राज बब्बर और दीपक पराशर के साथ लीड रोल में नजर आई थी पाकिस्तानी अभिनेत्री सलमा आगा. इस फिल्म की शुरुवात होती है अभिनेत्री तनुजा की आवाज से होती है. जहां वो पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति का दर्द बयां करती है. हैदराबाद की एक यूनिवर्सिटी पढ़ने वाला हैदर (राज बब्बर) अपने कॉलेज में पढ़ने वाली निलोफर (सलमा आगा) को पसंद करता. लेकिन निलोफर की शादी नवाब वसीम (दीपक पराशर) से हो जाती है. शादी के बाद निलोफर तो अपने पत्नी होने का धर्म निभाती है लेकिन वसीम दूसरी जरूरी चीजों में उलझा रहता है. जिसके कारण दोनों के बीच खटपट शुरू हो जाती और फिर एक दिन गुस्से में आकर वसीम निलोफर को तीन बार तलाक बोलकर छोड़ देता है. यही से शुरू होती है हर उस महिला की कहानी जो तीन तलाक के दंश से मारी है. तीन तलाक कैसे एक औरत की जिंदगी में तूफान लेकर आता और उसकी बसी बसाई दुनिया को उजाड़ देता है. ये सब कुछ इस फिल्म में देखने को मिलता है.

पहले इस फिल्म का नाम तलाक..तलाक..तलाक रखा जाना था. लेकिन जब बी.आर चोपड़ा को अहसास हुआ की लोग इस फिल्म का नाम भी नहीं ले पाएंगे तो उन्होंने इसका नाम बदलकर ‘निकाह’ कर दिया गया. इस फिल्म में वैसे तो कोई बड़ा नाम नहीं था. लेकिन बीबीसी की खबर के मुताबिक इस फिल्म ने रिलीज के बाद भारत के साथ पाकिस्तान में भी लोगों को हिला कर रख दिया था. कई जगहों पर फिल्म को बैन भी कर दिया गया. फिल्म के खिलाफ कई फतवे जारी किए गए और रातोरात विरोध करनेवाले मौलवियों को बुलाकर फिल्म दिखाई गई. बावजूद इसके फिल्म ने उस वक़्त अच्छा कारोबार किया और राइटर अचला नागर की इस दमदार कहानी को महिलाओं का जबरदस्त साथ मिला.