इसमें कोई दो राय नहीं अंग्रेजी भाषा के मोहपाश में हम दिन-ब-दिन  जकड़ते ही जा रहे हैं. लेकिन मोह तो वो भी है. जो रगों में बसा है. जो न छूट सकता है. न ही उसे नज़र अंदाज किया जा सकता है. क्योंकि वो अपना है. कभी न खत्म होने वाला. एक अहसास, एक सुकून, एक शांति. उससे डर नहीं लगता. स्नेह आता है. वो ‘मां’ हैं. हमारी मातृभाषा है, हिंदी. सरल, सम्मानित, ज्ञानी, अपनी हिंदी.

जब आत्मीयता की बात आती है. तब हिंदी याद आती है. जब हिंदी याद आती है तो गुलजार की दिल को छू जाने वाली कविताएं भी याद आती है. आइए इस मौके पर हम आपको सुनाते हैं उनकी लिखी, उनके द्वारा पढ़ी, उन्हीं की कुछ कविताएं.