हिंदी सिनेमा में बेमिसाल गायक के नाम से मशहूर सहगल का जन्म 11 अप्रैल, 1904 को हुआ था. शानदार गायक होने के साथ-साथ सहगल ने अपने अभिनय से भारतीय दर्शकों के दिलों पर राज किया और इसी वजह से उन्हें देश का पहला सुपरस्टार कहा जाने लगा. 1935 में  फिल्म ‘देवदास’ सहगल के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई. कुंदन लाल सहगल की 114वीं जयंती पर गूगल उन्हें डूडल बना कर याद कर रहा है. अपने करियर में ए.एल सहगल ने 36 फिल्मों में काम किया और 200 से ज्यादा गाने गाए. सहगल का जन्म जम्मू में हुआ था. उनके पिता अमरचंद सहगल जम्मू के राजा के न्यायालय में तेहसीलदार थे. जबकि मां केसरबाई भगवान की भक्ति में लीन और संगीत प्रेमी थीं. प्रारंभिक शिक्षा के बाद सहगल ने स्‍कूल छोड़ दिया. वह मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर टाइमकीपर की नौकरी करने लगे. उसके बाद कानपुर में चमड़े के कारोबारियों के यहां नौकरी की, यहां गजल की महफिलें लगाने वाले सहगल ‘चमड़ा बाबू’ के नाम से मशहूर हो गए. सहगल साहब की जयंती पर सुनिए कुछ सदाबहार गाने….

कहते हैं कि केएल सहगल ने एक बड़े संगीत आयोजन में इसलिए गाने से मना कर दिया था क्योंकि उस दिन उन्हें अपने ड्राइवर की बेटी की शादी में गाने के लिए जाना था. एक बार किसी की मदद के लिए उन्होंने बाजार में घूम-घूमकर गाना गाया और चंदा इकट्ठा किया था. आप उनकी लोकप्रियता का आलम इस बात से लगा सकते हैं कि लता मंगेशकर से लेकर किशोर कुमार तक के एल सहगल को अपना गुरू मानते थे. सहगल महज 43 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन इस छोटे से दौर में उन्होंने शोहरत की बुलंदियां हासिल कर ली थीं. उनका निधन 18 जनवरी, 1947 को जलंधर में हुआ था.