हिंदुस्तान में हिंदी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है. ये हमारी राष्ट्रभाषा भी है लेकिन इसके बावजूद लोग अब वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करते हुए इंग्लिश बोलना ज्यादा पसंद करते हैं. आलम ऐसा है कि अब जिसे अंग्रेजी ना आती हो और वो हिंदी में बात करे तो लोग उसे जाहिल समझते लेते हैं और उसका मज़ाक भी उड़ाते हैं. हम हिंदुस्तानी ये भूल गए हैं कि अपनी हिंदी भाषा पर हमें गर्व होना चाहिए.

बॉलीवुड में कई ऐसे फिल्ममेकर हैं जिन्होंने हिंदी को महत्व देते हुए कई ऐसी फिल्मों का निर्माण किया है, जो हिट रहीं है और हमें हिन्दी भाषी होने पर गर्वित करतीं हैं. आइए उन्ही में से कुछ फिल्मों से आपको रूबरू करवाते हैं.

हिंदी मीडियम

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19 मई 2017 के दिन रिलीज हुई फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ उन फिल्मों में शामिल है जो सुपरहिट हुई. फिल्म में हिंदी मीडियम को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया गया है. फिल्म में इरफ़ान खान अमीर है पर इंग्लिश बोलने में गरीब. इसलिए इरफ़ान चाहतें हैं कि वे अपनी एकलौती बेटी को दिल्ली शहर के सबसे महंगे इंग्लिश स्कूल में दाखिला दिलवाएं ताकि उनकी बच्ची फर्राटेदार इंग्लिश बोल सके. बच्ची को इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए हिंदी मीडियम पिता को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है ये फिल्म में दिखाया गया है.

इंग्लिश विन्ग्लिश

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इस फिल्म में लीड किरदार अभिनेत्री श्रीदेवी ने निभाया है. फिल्म में श्रीदेवी को अंग्रेज़ी नहीं आती इसलिए उन्हें पति और बच्चों से अक्सर ताने सुनने पड़ते हैं. एक शादी की वजह से श्रीदेवी को न्यूयॉर्क जाना पड़ता है और वो न्यूयॉर्क में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स ज्वाइन कर लेती है. इंग्लिश सीखने के बाद श्रीदेवी को पता चलता है कि हिन्दुस्तान में अंग्रेज़ी को यूं ही पहाड़ बनाकर रखा गया है.

नमस्ते लंदन

Namastey London

फिल्म में अक्षय कुमार अपना प्यार और अपनी पत्नी को पाने की चाह लिए लंदन पहुच जातें है. जहां-जहां भी मौक़ा मिलता है अक्षय ने फिल्म में भारत का और हिंदी भाषा का प्रचार किया है. वैसे भी हम अक्षय कुमार की वो स्पीच कैसे भूल सकतें है जिसमे वे लंदन के गोरे मुंडे को हिन्दुस्तान की सभ्यता के साथ-साथ हिंदी का महत्व समझातें हैं.

गोलमाल

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यह फिल्म 1979 में रिलीज की गई थी. इस फिल्म के सभी किरदार जानदार थे पर ज़िक्र सिर्फ अमोल पालेकर और उत्पल दत्त की कॉमेडी की ही होती है. फिल्म में उत्पल जी ने ठान रखी है कि वे अपने दफ्तर में उसी बन्दे को नौकरी देंगे जो हिंदी भाषा में बढियां जानकारी रखता हो. नौकरी पाने के चक्कर में अमोल पालेकर को डबल रोल की भूमिका निभानी पड़ती है. आखिरकार अमोल को बात समझ आ ही जाती है कि हिंदी भाषा की भारत में क्या महत्वता है. फिल्म में बिन्दिया गोस्वामी, दीना पाठक, ओम प्रकाश, युनुस परवेज औऱ अमिताभ बच्चन ने भी अहम किरदार निभाया था.

चुपके चुपके 

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‘चुपके चुपके’ फिल्म अगर आपने देखी है तो हम यह यकीन से कह सकतें है कि ये फिल्म आज भी आपकी यादगार फिल्मों में से एक होगी. ये फिल्म साल 1975 में रिलीज़ हुई थी. फिल्म में अभिनेता धर्मेन्द्र की शानदार हिंदी ने सभी का मन मोह लिया. साथ ही ये भी बताया कि हिंदी भाषा अपने-आप में ही महान है. यह भले ही एक कॉमेडी फिल्म है पर किसी गंभीर मुद्दे से कम नहीं. इस फिल्म में शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और ओम प्रकाश लीड रोल में हैं.