धोराजी (गुजरात). गुजरात की धोराजी विधानसभा सीट पर चुनाव पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के नेता हार्दिक पटेल के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है. हार्दिक के प्रमुख सहयोगियों में से एक ललित वसोया यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. राजकोट जिले में पटेल समुदाय की बहुलता वाली इस विधानसभा सीट पर वसोया का मुकाबला बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व लोकसभा सदस्य हरीलाल पटेल के साथ है. 

Gujarat Caste Politics | गुजरातः जतिगत राजनीति का केंद्र बना चुनाव, 4 फीसदी वोट बदल देगा गणित

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धोराजी सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस का एक मजबूत गढ़ रही है. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने से पूर्व पटेल समुदाय के दिग्गज नेता विट्ठल रदाड़िया कांग्रेस के टिकट पर पांच बार इस सीट से विधायक चुने गये थे. रदाड़िया इस समय लोकसभा में पोरबंदर से बीजेपी सांसद हैं. धोराजी एकमात्र विधानसभा सीट है जहां पर कांग्रेस ने हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले पीएएएस के एक नेता को मैदान में उतारा है.

इस निर्वाचन क्षेत्र में पाटीदारों की बड़ी संख्या है लेकिन मुस्लिम और दलित भी बड़ी संख्या में हैं. इन सभी कारकों का असर इस सीट पर होने जा रहे चुनाव में पड़ सकता है. हालांकि, पाटीदार और दलितों के मुद्दों से अधिक प्रभावी मुद्दा यहां स्थानीय स्तर पर विकास का है क्योंकि धोराजी शहर में भूमिगत सीवेज प्रणाली अधूरी है और सड़क अवसंरचना की हालत अच्छी नहीं है. किसानों के लिए कपास और मूंगफली जैसी उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य हासिल करना बड़ी दिक्कत है.

वसोया ने कहा ‘यहां जाति और पार्टीदारों के मुद्दों से अधिक प्रभावी स्थानीय मुद्दे हैं. बीजेपी शासित नगर पालिका भूमिगत सीवेज प्रणाली को समय पर पूरा नहीं कर पाई. यह अब तक अधूरी है.’ पीएएस नेता धुआंधार प्रचार कर रहे हैं और स्थानीय निकाय में कथित भ्रष्टाचार तथा गांव में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.