गुरुग्राम. प्रद्युम्न मर्डर केस में सीबीआई ने सोमवार को गुरुग्राम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को सवाल जवाब और बातचीत के लिए तलब किया. सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने पाया है कि कई स्पष्ट सुराग थे जिन्हें या तो मिस कर दिया गया या गलत तरीके से पेश किया गया, और ये सब पुलिस की जांच में हुआ. 

प्रद्युम्न की हत्या का आरोपी छात्र बोला- मुझे जो करना था, कर दिया

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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एसआईटी ने ही रेयान स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड की शुरुआती जांच की थी और उसने स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया था. सीबीआई की दो टीमें सोमवार को गुरुग्राम में ही थीं. एक टीम स्कूल में थी और उसने गुरुग्राम पुलिस को कहा कि वह तब तक अंदर न आए जब तक टीम परिसर में है. वहीं, सीबीआई की दूसरी टीम कोर्ट में थी जहां एसआईटी के सदस्यों को बुलाया गया था. हालांकि सीबीआई ने आधिकारिक रूप से इस मीटिंग की पुष्टि करने से इनकार कर दिया.

सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अधिकारियों से सवाल किया गया कि आखिर कैसे उन्होंने कई स्पष्ट सुरागों को छोड़ दिया. एसआईटी ने इस मामले की 10 दिन तक जांच की थी, उसने दावा किया कि वह व्यवस्थित जांच से गुजरी और उसने कई बार सीसीटीवी फुटेज को देखा. दावा ये भी किया गया कि 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई. अब तक, जो छात्र मुख्य अभियुक्त है वह एसआईटी के लिए मुख्य गवाह बना रहा.

पिछले हफ्ते, जब सीबीआई ने 11वीं क्लास के स्टूडेंट को आरोपी के रूप में पहचान लिया, उसके बाद से ही जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कैसे ये छात्र गुरुग्राम पुलिस को बेवकूफ बनाता रहा. सूत्रों ने दावा किया कि एसआईटी के 4 सदस्यों को सीबीआई ने सोमवार को सवाल-जवाब के लिए बुलाया था. एक एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर और एक लोअर रैंक का अधिकारी इसमें पहुंचे थे. 

प्रद्युम्न मर्डर केस: अब तक की कहानी, कब-क्या हुआ

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सूत्रों ने आगे जोड़ा कि एसआईटी सदस्यों को जांच के तथ्यों की पुष्टि के लिए बुलाया गया था. अंग्रेजी अखबार के संवाददाता ने जब इनसे बात करने की कोशिश की तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया. एसआईटी की जांच का नेतृत्व डीसीपी (साउथ) अशोक बख्शी ने किया था. एक सीबीआई अधिकारी ने सोमवार को कहा कि ऐसे कई सुराग थे जिन्हें पुलिस को आमतौर पर मिस नहीं करना चाहिए था. हालांकि अधिकारी ने कहा कि हम किसी तरह का आरोप नहीं लगा रहे हैं लेकिन हम जानने को उत्सुक हैं कि कैसे जांच अधिकारियों ने इसे छोड़ा या घुमाकर पेश किया.

सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने कहा कि अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई को 16 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया है और वह उसके बाद ही सवालों का जवाब दे सकेगी.

एक और चूक
इस मामले में एक और चूक सामने आई है. जघन्य अपराध के मामले में, एक एसएचओ लेवल का अधिकारी ऑफिशियल रिकॉर्ड्स में एंट्री करता था. लेकिन प्रद्युम्न केस में, एक सब इंस्पेक्टर को ऐसा करने के लिए कहा गया. ये वही पुलिस ऑफिसर था जिसने कंडक्टर को गिरफ्तार किया था. इन सबके बीच, इस मामले में गुड़गांव पुलिस की चुप्पी बनी हुई है.