न्यूयॉर्क: सेहतमंद बुजुर्ग व्यक्ति ठीक उसी प्रकार मस्तिष्क की नई कोशिकाएं विकसित कर सकते हैं जैसे युवा करते हैं. अनुसंधानकर्ताओं ने पहली बार ऐसी खोज की है. उम्रदराज इंसानों के नए न्यूरॉन विकसित करने की क्षमता पर हमेशा से ही विवाद रहा है और कुछ अनुसंधानों में पूर्व में यह सुझाया भी गया है कि वयस्क मस्तिष्क में कोई बदलाव नहीं हो सकता और वह नए न्यूरॉन (दिमाग की कोशिकाएं) नहीं बना सकते.

‘सेल स्टेम सेल’ जर्नल में प्रकाशित हुआ नया अध्ययन इस धारणा को नकारता है. अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर मौरा बोल्द्रिनी ने कहा कि अध्ययन के परिणाम सुझाते हैं कि आम मान्यता के उलट कई उम्रदराज व्यक्ति ज्ञान और भावनात्मक तौर पर ज्यादा मजबूत रहते हैं.

बोल्द्रिनी ने कहा, “हमने पाया कि बुजुर्ग व्यक्तियों में युवाओं की ही तरह मूल कोशिकाओं से हजारों नए न्यूरॉन बनाने की क्षमता होती है.”  उन्होंने कहा, “हमने यह भी पाया कि उनमें हिप्पोकैंपस (मस्तिष्क की वह संरचना जिसका संबंध भावनाओं और ज्ञान से होता है) का विस्तार भी युवा मस्तिष्क के बराबर ही होता है.”

अब तक आम धारणा यही है कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की कोशिकाएं शिथिल होती जाती हैं और नई कोशिकाएं उस तेजी से नहीं बनती, जैसी युवाओं में होती हैं. हालांकि, इस नई रिसर्च में इस मान्यता को नकार दिया गया है.