लंदन: बेरी में पाए जाने वाले रंजक कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं के एक प्रमुख एन्जाइम को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकते हैं. ये दावा ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है. ये नई स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड में की गई है.

सिरटन नामक एन्जाइम जीनो के प्रसार को विनियमित करता है. उम्र बढ़ने के साथ सिरटन के काम में अंतर आता है जिससे विभिन्न रोग पैदा होते हैं. सिरटन 6 को संक्षेप में सिर्ट 6 कहते हैं. यह एक ऐसा एन्जाइम है, जिसके बारे में लोगों को बहुत कम मालूम होता है. यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, प्राकृतिक रंजक एंथोस्यानिन की वजह से बेरी लाल, नीले या बैंगनी रंग के होते हैं.

‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की प्रमुख लेखिका मिन्ना राहनास्तो रिल्ला ने बताया, ”हमारे अध्ययन का सबसे दिलचस्प निष्कर्ष स्यानिडीन से जुड़ा हुआ है. यह एक प्रकार का एंथेस्यानिन है. ये वाइल्ड बिलबेरी, ब्लैककरंट , लिंगनबेरी में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.

स्यानिडीन इंसानों के कोलोरेक्टल कैंसर कोशिकाओं में सिर्ट 6 के स्तर को बढ़ा देता है. यह ट्विस्ट 1 और ग्लूट 1 कैंसर जीनों के प्रसार को धीमा कर देता है. इससे ट्यूमर को खत्म करने वाले फोरहेड बॉक्स ओ 3 नामक जीन का प्रसार बढ़ जाता है. यह अध्ययन कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकता है. (इनपुट एजेंसी)