लंदन। कम वेतन पर या अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल में नौकरी कर रहे लोगों के बेरोजगार लोगों के मुकाबले स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने की अधिक आशंका होती है. ब्रिटेन में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है. वैज्ञानिकों में भारतीय मूल का एक वैज्ञानिक भी शामिल है.

शोधकर्ताओं ने वर्ष 2009 से 2010 के दौरान बेरोजगार 35 से 75 साल की आयु के एक हजार लोगों का अध्ययन किया. उन्होंने आगामी कुछ वर्षों में इन लोगों के स्वास्थ्य और उनके हार्मोन्स द्वारा दिखाई दे रहे दीर्घकालिक तनाव के स्तर पर नजर रखी.

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तरानी चंदोला समेत शोधकर्ताओं के दल ने पाया कि खराब गुणवत्ता का काम करने वाले वयस्कों में दीर्घकालिक स्तर का उच्च तनाव स्तर पाया गया जबकि जो लोग बेरोजगार रहे उनमें यह कम देखा गया.

शोधकर्ताओं ने कहा कि अच्छी नौकरी करने वाले वयस्कों में बायोमार्कर का कम स्तर पाया गया. उन्होंने कहा कि बेरोजगार लोगों के मुकाबले अच्छी गुणवत्ता की नौकरी करने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ लेकिन खराब गुणवत्ता का काम करने वालों और बेरोजगार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में कोई अंतर नहीं था. यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमायलॉजी में प्रकाशित हुआ है.