नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए 110 लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हाल के वर्षों में यह दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य खरीदारी में से एक हो सकती है. इससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा और दुश्मन के खिलाफ वायुसेना ज्यादा मजबूत होगी. एयरफोर्स के अधिकारियों के मुताबिक इस प्रक्रिया के दौरान रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन (आरएफआई) या इनीशियल टेंडर जारी कर दिया गया है, इसके तहत किसी विदेशी कंपनी के साथ मिलकर लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इन विमानों को हाल ही में लॉन्च किए गए स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत बनाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य उच्च तकनीक को भारत में लाना है ताकि मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा सके.

भारतीय वायुसेना अपनी ताकत में इजाफा करना चाहती है. इससे पहले ऐसी खबरें आई थी कि भारतीय वायुसेना में मौजूद एयरक्राफ्ट पुराने पड़ चुके हैं और किसी भी आपातकाल स्थिति से निपटने के लिए वायुसेना के पास पर्याप्त संख्या में एयरक्राफ्ट नहीं है. बॉर्डर पर आए दिन पाकिस्तान और चीन से तनातनी की खबरों के बीच 110 लड़ाकू विमानों के लिए प्रोसेस शुरू करना एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है. भारतीय वायुसेना ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहती है.

इस सौदे की स्पर्धा में लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, साब और दसॉल्ट समेत अन्य सैन्य विमान निर्माता कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है. वायु सेना पुराने हो चुके कुछ विमानों को बाहर करने के लिए अपने लड़ाकू विमान बेड़े की गिरती क्षमता का हवाला देते हुए विमानों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रही है.

सरकार द्वारा पांच साल पहले वायु सेना के लिए 126 मध्यम लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) की खरीद प्रक्रिया को रद्द करने के बाद लड़ाकू विमानों के लिए यह पहला बड़ा सौदा होगा.

इससे पहले भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना को मजबूती देने के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया है. पिछले दिनों फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस समझौते को फाइनल किया गया था. इस सौदे की कीमत 59 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है, हालांकि इस सौदे की कीमत को लेकर देश में काफी घमासान मचा था, विपक्षी पार्टियों ने केंद्र की मोदी सरकार को इसे लेकर घेरा भी था.

हालांकि उस समय विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने 36 राफेल जेट के सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि घोटाला प्रभावित बाफोर्स तोप सौदे और लड़ाकू विमानों की खरीद के बीच तुलना नहीं की जा सकती है.