बीजेपी संसदीय बोर्ड ने उपराष्ट्रपति पद के लिए वरिष्ठ नेता और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के नाम पर मुहर लगाई है. नायडू का मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी से होगा. आखिर क्या वजह रही कि वेंकैया नायडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की पसंद बन गए. आइए जानते हैं इस फैसले के पीछे 5 महत्वपूर्ण फैक्टर्स-

1. दक्षिण भारतीयः वेंकैया नायडू आंध्र प्रदेश के हैं. एनडीए ने पहले ही उत्तर भारत के राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुनाव में उतार दिया था. कोविंद यूपी के कानपुर से आते हैं. वेंकैया नायडू के चयन से रीजनल फैक्टर बैलेंस होगा.

2. राज्यसभा का अनुभवः वेंकैया चौधी बार राज्यसभा के सांसद बने हैं. ऊपरी सदन में उनका लंबा अनुभव है. ये बात पदेन सभापति के लिए उनके पक्ष में जाती है. वेंकैया 1998 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे. 2004 में वह दूसरी बार सदन में पहुंचे. फिर 2010 और फिर 2016. वह कई संसदीय समितियों के सदस्य हैं और कुछ के अध्यक्ष भी हैं.

3. जमीन से जुड़ा बीजेपी कार्यकर्ताः वेंकैया नायडू 1975 से 1977 के दौरान मीसा एक्ट के तहत जेल गए थे. वह 1977 से 1980 की अवधि में आंध्र प्रदेश जनता पार्टी के अध्यक्ष थे. वह पहली बार आंध्र प्रदेश विधानसभा में 1978 में विधायक के तौर पर चुने गए थे. 1980 से 1983 की अवधि के बीच वह बीजेपी की यूथ विंग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे. 1980 से 1985 के बीच वह विधानसभा  में बीजेपी विधायक दल के नेता थे. बीजेपी आंध्र प्रदेश यूनिट के राज्यध्यक्ष वह 1988 से 1993 की अवधि के बीच रहे. 1993 से 2000 के बीच वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे. जुलाई 2002 में  वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए.

4. वरिष्ठताः वेंकैया कैबिनेट में नंबर-5 पर थे. उनसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं. अटल सरकार में सितंबर 2000 से  जून 2002 तक वो ग्रामीण विकास मंत्री थे. मोदी सरकार में उन्हें 26 मई 2014 को फिर केंद्रीय मंत्री का दायित्व सौंपा गया. वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें शहरी विकास मंत्री का पद्भार दिया गया.

5. राज्यसभा में पार्टी को फायदाः राज्यसभा में फायदे के लिहाज से बीजेपी के लिए ये चुनाव अच्छा कदम है लेकिन मोदी के निजी तौर पर ये नुकसान है. नायडू की छवि बीजेपी के नम्र और समझदार नेताओं में होती है. कई मौकों पर वह मोदी का बचाव करते रहे हैं. वह पीएम के लिए फायर फाइटर थे.