नई दिल्लीः आधार पर सुनवाई के दौरान बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विशेषज्ञों ने आधार योजना को मंजूरी दी है. इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती, क्योंकि यह एक नीतिगत फैसला था.सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि आधार के तहत उंगलियों के निशान सहित बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा का संग्रह किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता.

इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि UIDAI के पास अधिकार है कि वो ये तय करे कि क्या बायोमैट्रिक लेना है और किस तरीके से इसे इकट्ठा करना है. कल को ये भी हो सकता है कि कहा जाए कि डीएनए टेस्ट के लिए खून का नमूना देना होगा. क्या ये शक्ति का अत्यधिक अधिकार नहीं है? निजता के अधिकार का हनन नहीं है?

इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि हम कल के बारे में नहीं जानते. हालांकि यह संभव है कि खून, मूत्र या लार के नमूने एकत्र किए जाएं. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो कई गैर-सरकारी संगठन हैं जो इस मुद्दे को चुनौती देंगे. केंद्र ने बताया कि आधार धनशोधन रोकने और सब्सिडी एवं लाभ देने का बेहतरीन जरिया है.

नीतिगत निर्णयों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती
संविधान पीठ आधार योजना और इससे जुड़े 2016 के कानून की वैधता का परीक्षण कर रही है. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति ए के सीकरी, ए एम खानविलकर, डी वाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण की सदस्यता वाली पीठ को बताया कि विशेषज्ञों द्वारा मंजूर सरकार के नीतिगत निर्णयों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती.

ऐसे तो थम जाएगी विकास की रफ्तार
काफी लंबी चली सुनवाई में वेणुगोपाल ने विश्व बैंक सहित कई अन्य रिपोर्टों का हवाला दिया और कहा कि उन्होंने माना है कि भारत ने गरीबों में गरीब की पहचान के लिए एक कदम उठाया है जिससे सभी के लिए वित्तीय समावेश का लक्ष्य प्राप्त करने में आखिरकार मदद मिलेगी. वेणुगोपाल ने कहा कि यदि सरकार के हर कदम की न्यायिक समीक्षा होने लगी तो विकास की रफ्तार थम जाएगी. उन्होंने कहा कि अदालतों को तकनीकी विशेषज्ञता के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.

कोर्ट का काम कानून की भाषा की व्याख्या करना
उन्होंने कहा कि अदालत का एकमात्र कर्तव्य कानून की भाषा की व्याख्या करना है और वह यह तय नहीं कर सकती कि कोई नीतिगत निर्णय उचित है कि नहीं. पीठ ने वेणुगोपाल से कहा कि योजना का विरोध कर रहे लोग कहते हैं कि यह आनुपातिकता के सिद्धांत का उल्लंघन है.

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आधार योजना साधन एवं लक्ष्य के बीच तार्किक गठजोड़ को दिखाकर आनुपातिकता को संतुष्ट करती है. उन्होंने कहा कि सभी सब्सिडी गरिमा के साथ जीने के अधिकार का हिस्सा हैं और यह निजता के अधिकार पर वरीयता पाएगी. इस मामले में गुरुवार को भी बहस होगी.