इलाहाबाद| नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट 12 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा. न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ दोपहर दो बजे के बाद इस केस में फैसला सुनाएगी. इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआइ कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है. दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था. अब गुरुवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी.

मालूम हो कि डा. तलवार की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी. शुरुआत में शक की सुई घर के नौकर हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से हेमराज की लाश भी बरामद हुई थी.

यह मामला उस वक्त खूब सुर्खियों में छाया रहा था. जिसके बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी थी. तभी से यह मामला कोर्ट में चल रहा है.सीबीआइ ने सीधा सबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन सीबीआइ कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए तलवार दंपती के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.

क्या है पूरा मामला?

16 मई 2008- दन्त चिकित्सक राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि व उनके घरेलू नौकर हेमराज की हत्या

17 मई 2008- पड़ोसी की छत से हेमराज का शव बरामद.

23 मई 2008- आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ़्तार.

24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना.

29 मई 2008- मुख्यमन्त्री मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की.

जून 2008- सीबीआई ने जांच शुरू कर एफ़आईआर दर्ज़ की.

12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया.

सितम्बर 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार के सहायक और दो नौकरों को भी रिहा कर दिया गया.

9 फ़रवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज.

जनवरी 2010- राजेश और नूपुर के नार्को टेस्ट की इजाजत मिली.

दिसम्बर 2010- 30 महीने तक चली जाँच के बाद सीबीआई ने अदालत को क्लोज़र रिपोर्ट सौंपी.

25 जनवरी 2011- नए सिरे से जांच की मांग को लेकर राजेश तलवार पर कोर्ट परिसर में हमला हुआ.

12 अप्रैल 2011- नूपुर की जमानत पर सुनवाई से उच्चतम न्यायालय ने मना कर दिया.

6 जनवरी 2012- उच्चतम न्यायालय ने तलवार दम्पति पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया.

30 अप्रैल 2012- नूपुर तलवार को भी गिरफ़्तार किया गया.

जून 2012- अदालत के निर्देश पर फिर से सुनवाई शुरू हुई.

25 सितम्बर 2012- नूपुर तलवार की रिहाई का आदेश जारी हुआ.

24 अप्रैल 2013- सीबीआई ने राजेश तलवार पर हत्या का आरोप लगाया.

11 जून 2013- गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू किये गये.

12 नवम्बर 2013- मुकदमें की अन्तिम सुनवाई पूर्ण हुई.

25 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को अपनी पुत्री आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी करार दिया गया.

26 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को उम्रक़ैद की सजा. फिलहाल राजेश व नुपुर गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं.