नई दिल्ली| आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को इलाहबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सीबीआई के सबूतों को नाकाफी माना और सबूतों के अभाव में आरुषि के माता पिता राजेश तलवार और नुपुर तलवार को कातिल मानने से इनकार कर दिया. हाईकोर्ट के इस फैसले से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद तलवार दंपति को आज रिहा किया जा सकता है. कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसला आने के बाद अब तलवार दम्पत्ति के वकील कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी लेकर गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट लेकर पहुंचेंगे. इसके बाद सीबीआई कोर्ट रिलीज ऑर्डर जारी करेगी जिसे डासना जेल में देना होगा. इसके बाद तलवार दम्पत्ति की रिहाई होगी.

डासना जेल के जेलर डी मौर्या ने कहा कि अभी तक ऑर्डर की कॉपी नहीं पहुंची है. बिना ऑर्डर के रिहाई की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती.

खंडपीठ का फैसला
जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस ए के मिश्रा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि सीबीआई की दलील में दम नहीं है. वारदात के वक्त घर में सिर्फ राजेश और नुपूर तलवार थे इसलिए हत्या इन्हीं लोगों ने की ये साबित नहीं होता. हत्याकांड में कोई ठोस सबूत नहीं है, तलवार दंपति को संदेह का लाभ दिया जाता है.

ये है पूरा मामला
तलवार दंपति की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी. शुरुआत में शक की सुई घर के नौकर हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से हेमराज की लाश भी बरामद हुई थी. यह मामला उस वक्त खूब सुर्खियों में छाया रहा था. जिसके बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी थी. तभी से यह मामला कोर्ट में चल रहा है.

हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी लेकिन आरुषि को अधूरा न्याय, हत्यारा कौन?

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सीबीआई ने सीधा सबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन सीबीआई कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए तलवार दंपती के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी थी तभी से तलवार दंपति जेल में बंद हैं. इस सजा पर तलवार दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई की अदालत के आदेश के खिलाफ तलवार दंपति की अपील को बरकरार रखा और गुरुवार को फैसला सुनाते हुए तलवार दंपति को बरी कर दिया.

मर्डर का सिलसिलेवार घटनाक्रम-

16 मई 2008: आरुषि तलवार अपने बेडरूम में मृत पाई गई. हत्या का शक घरेलू सहायक हेमराज पर.

17 मई 2008: हेमराज का शव उस इमारत की छत पर पाया गया जिसमें तलवार का फ्लैट है.

19 मई 2008: तलवार के पूर्व घरेलू सहायक विष्णु शर्मा को संदिग्ध माना गया.

23 मई: आरुषि के पिता राजेश तलवार को मुख्य आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया.

01 जून: मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ली.

13 जून: सीबीआई ने तलवार के घरेलू सहायक कृष्णा को गिरफ्तार किया.

26 जून: सीबीआई ने मामले को सुराग विहीन बताया . गाजियाबाद के विशेष मेजिस्ट्रेट ने राजेश तलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया.

12 जुलाई: राजेश तलवार को जमानत दी गई.

आरुषि हत्याकांड: हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी, 1418 दिन जेल में काटे

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29 दिसंबर: सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट जमा की, जिसमें घरेलू सहायकों को क्लीन चीट दिया गया लेकिन माता-पिता की तरफ ऊंगली उठाई.

9 फरवरी, 2011: अदालत ने सीबीआई रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह आरुषि के माता-पिता पर लगाए गए हत्या और सबूत मिटाने के अभियोजन के आरोप को लेकर मामला जारी रखें.

21 फरवरी: तलवार दंपत्ति ने इलाहाबाद कोर्ट से निचली अदालत द्वारा जारी किए गए सम्मन को खारिज करने के लिए संपर्क किया.

18 मार्च: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.

नवंबर, 2013: राजेश और नुपूर तलवार को दोहरी हत्या का दोषी करार देते हुए सीबीआई की एक विशेष अदालत ने गाजियाबाद में उन दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

7 सितंबर, 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने माता-पिता की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा और 12 अक्तूबर को फैसले की तारीख दी.

12 अक्तूबर, 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि के माता-पिता को बरी किया.