नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने एक एकजुट विपक्ष तो जिस तरह पटखनी दी उससे अब पार्टी के हौसले बुलंद हैं. इस जीत के साथ ही बीजेपी ने यूपी उपचुनाव में मिली करारी हार का बदला भी ले लिया. यूपी में वही नजारा दिखा जो कुछ समय पहले गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान दिखा था. घंटों विवाद के बाद देर रात विजेता उम्मीदवारों के नामों का ऐलान हुआ. कड़े मुकाबले के बाद यूपी में 10वीं सीट पर बीजेपी के अनिल अग्रवाल ने जीत हासिल की. बीजेपी ने अपनी रणनीति से सपा-बसपा को चित कर सभी को हैरान कर दिया. बीजेपी ने कैसे विपक्ष को हार झेलने पर मजबूर किया जानने की कोशिश करते हैं.

मुख्तार-हरिओम नहीं डाल सके वोट

दरअसल, यूपी में राज्यसभा चुनाव की दिलचस्प जंग तभी तय हो गई थी जब बीजेपी ने 10 सीटों पर अपने 9 उम्मीदवार उतार दिए थे. सपा-बसपा ने एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतारा. तभी ये तय हो गया था कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खेल होगा. लेकिन बीजेपी ने चुनाव से पहले की रणनीति पर भी जमकर काम किया. सपा-बसपा का एक एक विधायक को वोट डालने की इजाजत नहीं मिली. बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वोट डालने की इजाजत नहीं दी. योगी सरकार की याचिका पर कोर्ट ने ये फैसला दिया. वहीं सपा विधायक हरिओम को भी प्रशासन की ओर से वोट डालने का इजाजत नहीं मिली. इन दोने के नहीं होने से बीजेपी की जीत का रास्ता तैयार हुआ. रही सही कसर निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप उर्फ राजा भैया के तेवरों से पूरी हो गई. उन्होने साफ कह दिया कि वह अखिलेश के साथ हैं लेकिन मायावती के साथ नहीं.

बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग

विपक्षी दलों की क्रॉस वोटिंग ने बीजेपी की जीत में अहम भूमिका निभाई. वोटिंग शुरू होने से पहले ही इसके आसार नजर आने लगे थे. सपा-बसपा विधायकों के अलावा निर्दलीयों ने भी बीजेपी को मदद पहुंचाई. बीएसपी विधायक अनिल सिंह ने साफ ऐलान कर दिया कि वह बीजेपी को वोट देकर आए हैं. नरेश अग्रवाल के बेटे सपा विधायक नितिन अग्रवाल ने भी बीजेपी के पक्ष में वोट डाला. निषाद पार्टी के विधायक विजय मिश्रा भी बीजेपी के पाले में आ गए. निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने भी योगी के नाम पर बीजेपी को वोट डाला. इसके चलते बीएसपी की ताकत मतदान से पहले ही 33 वोटों तक सिमट गई और दूसरी वरीयता के हिसाब से बीजेपी के अनिल अग्रवाल जीत गए.

सीएम योगी की डिनर डिप्लोमेसी
मतदान से दो दिन पहले ही सीएम योगी ने सभी बीजेपी विधायकों की बैठक बुलाई थी. इसमें अनिल सिंह, नितिन अग्रवाल भी शामिल हुए. तभी से बीजेपी की रणनीति साफ होने लगी थी. मतदान के दिन भी सीएम योगी ने सभी विधायकों के साथ बैठक कर अपनी रणनीति पुख्ता की. उन्होंने इसे लेकर जरूरी निर्देश दिए और पार्टी के खिलाफ क्रॉस वोटिंग की संभावना पूरी तरह खत्म कर दी. सपा विधायक और सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने बयान दिया था कि सपा के पक्ष में भी क्रॉसिंग वोटिंग होगी, लेकिन उनका दावा बेदम निकला.