मुंबई: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को बीजेपी के 38वें स्थापना दिवस पर खुद को वैष्णव हिंदू बताया है. विकास के दावे के साथ 2014 का आम चुनाव पूर्ण बहुतमत से जीतने वाली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपनी पार्टी के स्थापना दिवस पर इस मुद्दे को उठाया कि वो जैन नहीं हैं बल्कि वैष्णव हिंदू हैं. मुंबई में पार्टी का स्थापना दिवस मनाते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के दावे को खारिज किया. कर्नाटक में पिछले पांच साल में भारी विकास का दावा करने वाले मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने चुनावी प्रचार के दौरान एक रैली में अमित शाह के धर्म पर सवाल उठाते हुए कहा था कि शाह जैन परिवार से आते हैं और वो हिंदू नहीं है.

शाह ने कहा, ‘‘ संप्रग सरकार ने 2013 में लिंगायत को अल्पसंख्यक समूह का दर्जा देने की सिफारिश को खारिज कर दिया था. मौजूदा फैसला सिर्फ येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए है. यह एक चुनावी चाल है.’’ उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि 2014 में बहुमत हासिल करने के बाद भी भाजपा ने हमेशा अपने सहयोगी दलों को शामिल किया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि शिवसेना भाजपा के साथ बनी रहेगी. इसके अलावा शाह ने पार्टी के संस्थापक सदस्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि हम राजनीति में मजे के लिए नहीं बल्कि गरीब और पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने के लिए आए हैं और आज पीएम मोदी अपनी योजनाओं से इस बात को लागू कर रहे हैं.

शाह ने कहा कि त्रिपुरा, असम और अन्य स्थानों पर बहुमत हासिल करने के बाद भी भाजपा ने अपने सहयोगियों को सरकार में शामिल किया है. उन्होंने कहा कि 2019 में भी हम एनडीए की सरकार बनाएंगे, साथ ही शाह ने ये भी दावा किया कि भाजपा को अपने दम पर बहुमत प्राप्त होगा. शिवसेना के बारे में पूछे गए एक सवाल पर शाह ने कहा कि वे अभी सरकार में हमारे साथ हैं और हमारी पूरी इच्छा है कि वे हमारे साथ रहें.

उन्होंने कहा कि भाजपा को अलग थलग करने के विपक्ष के प्रयासों के बाद भी भाजपा अपने सहयोगियों के साथ 2019 के चुनाव में विजयी होगी.