भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने आज अपने बेटे जय शाह पर लगे आरोपों पर पहली बार सफाई दी. अमित शाह ने कहा कि जय शाह की कंपनी में भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, फिर भी उसने अब तक एक भी मानहानि याचिका दाखिल नहीं की लेकिन जय ने मानहानि याचिका दायर की है. एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में अमित शाह ने ये बात कही.

शाह ने कहा कि कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के इतने आरोप लगते रहे, लेकिन उसने एक भी मानहानि का दावा नहीं किया, क्या कभी उसने सौ करोड़ की मानहानि का केस किया? जय ने इस मामले में आपराधिक मानहानि का केस फाइल किया है. विपक्ष जांच की मांग कर रहा है, जय ने तो खुद ही कहा है कि जांच हो. अगर आपके पास तथ्य हैं तो कोर्ट जाइए. कोर्ट ही इस पर फैसला करेगी. 

कांग्रेस ने जय शाह मामले में सीबीआई जांच की मांग की

कांग्रेस ने जय शाह मामले में सीबीआई जांच की मांग की

अमित शाह ने कहा कि जय की कंपनी ने एक रुपये का व्यापार भी सरकार के साथ नहीं किया है, ना ही एक रुपये की मदद ली है. कंपनी ने न तो सरकारी जमीन  ली है और न ही बोफोर्स की तरह दलाली खाई है. इसमें भ्रष्टाचार का सवाल ही पैदा नहीं होता.

इसी के साथ अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे प्रहार भी किए. शाह ने कहा कि अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को रोहिंग्या मुस्लिमों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.

बता दें कि एक न्यूज वेबसाइट ने दावा किया है कि जय शाह की कंपनियों ने 1600 गुना ज्यादा मुनाफा कमाया है. जय शाह ने इसे मनगढ़ंत रिपोर्ट करार देते हुए वेबसाइट पर 200 करोड़ मानहानि का दावा ठोक दिया है. कोर्ट में सुनवाई लंबित है. 

अमित शाह के बेटे पर पहली बार आया RSS के दत्तात्रेय होसबोले का बयान

अमित शाह के बेटे पर पहली बार आया RSS के दत्तात्रेय होसबोले का बयान

इस रिपोर्ट के बाद सियासी घमासान छिड़ गया और कांग्रेस को बीजेपी पर हमले का मौका मिला. राहुल गांधी ने इसे लेकर अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी प्रहार किए. राहुल अपनी हर रैली में इस मुद्दे को उठा रहे हैं. वहीं, बीजेपी ने हर मौके पर इसका बचाव किया है.

इस मामले पर संघ ने भी जय शाह का साथ दिया. संघ नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ है तो जांच होनी चाहिए. लेकिन आरोप लगाने वालों को आरोपों को सिद्ध भी करना चाहिए. प्रथम दृष्टया आरोपों के सिद्ध होने पर ही कार्रवाई हो सकती है. उससे पहले आरोप लगाने वालों को इन्हें सिद्ध करना चाहिए.