लखनऊ: देश की विपक्षी पार्टियों को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा ‘सांप-छछूंदर, कुत्ता-बिल्ली’ कहे जाने की निंदा करते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि भाजपा सत्ता के अहंकार व नशे में देश की जनता को ‘मूर्खो की जमात’ समझने की भूल कर रही है, जबकि होशमंद जनता लोकसभा चुनाव से पहले ही उसे बार-बार ठोकरें मार रही है. शाह ने विपक्षी एकता के प्रयासों पर कटाक्ष करते हुए शुक्रवार को मुंबई में एक रैली में कहा था कि, “देश में नरेंद्र मोदी की जो बाढ़ आई है, उसके डर से सांप, बिल्ली, नेवला, कुत्ते सब एक ही नाव पर सवार हो रहे हैं.”

उनके इस बयान पर मायावती ने कहा कि कुछ इसी प्रकार की अपमाननक, आपत्तिजनक व हीन भावना वाली ‘संघी भाषा’ का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किया गया था, जिसके लिए जनता ने उन्हें जोरदार चाबुक लगाकर करारी हार का कड़ा सबक सिखाया है. उन्होंने कहा, “जनता की चाबुक लगी, फिर भी बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व अपनी आपराधिक मानसिकता व संघी चाल व चरित्र से मजबूर नजर आता है, जिसे देश की जनता कतई नजरअंदाज करने वाली नहीं है.”

मायावती ने कहा कि शाह का बयान यह साबित करने को काफी है कि गुरु नरेंद्र मोदी व शिष्य अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी का स्तर किस हद तक नीचे गिर गया है. आज देश की जनता के सामने यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या ऐसी घोर असभ्यता व बदजुबानी देश की सत्ताधारी पार्टी को शोभा देती है? लोकतंत्र में विपक्ष का भी महत्व है, लेकिन जिन लोगों को तमीज ही नहीं है, उन्हें क्या कहा जाए.

शाह ने केंद्र में बहुमत की अपनी पहली सरकार बनाने को महान उपलब्धि बताया था, जिस पर मायावती ने कहा कि खासकर अमित शाह व नरेंद्र मोदी के अहंकारी व जनविरोधी हठधर्मी रवैये के कारण ही भाजपा केंद्र में अकेली पड़ गई है. उसके सहयोगी दल आज उसके खिलाफ बगावत का झंडा लेकर खड़े हैं.

(इनपुट: IANS)