आरुषि-हेमराज हत्याकांड में आज तलवार दंपति राजेश तलवार और नुपुर तलवार की रिहाई हो रही है. दोनों को सीबीआई अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. तलवार दंपति 2013 से गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं. इनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया. कोर्ट ने सीबीआई की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर इतनी बड़ी सजा नहीं दी जा सकती.

क्या-क्या कहा कोर्ट ने

1. तलवार दंपति को किसी ने मर्डर करते नहीं देखा था, इसलिए संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए.
2. तलवार दंपति का हत्या के वक्त घर के अंदर होना उनके दोषी होने का सबूत कैसे माना जा सकता है.
3. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से आरोप साबित नहीं होता है, इतनी बड़ी सजा तो सुप्रीम कोर्ट भी नहीं देता.
4.सीबीआई ने अपनी जांच में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं.
5.फैसले खुद बनाए तथ्यों पर नहीं होने चाहिए और साक्ष्यों को संकीर्ण नजरिए से देखना गलत है.
6. किसी को सजा देने के लिए परिस्थितिजन्य सबूत ठोस होने चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ.
7. जिस फ्लैट में हत्या हुई, उसमें किसी तीसरे व्यक्ति के होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
8. इस मामले में सीबीआई किसी भी तरीके से सबूत पेश करने में नाकाम रही है. एजेंसी परिस्थितियों को साबित करने में विफल रही.

हाई कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर आरुषि के माता पिता को बरी कर दिया और तुरंत रिहाई के आदेश दिए. हाई कोर्ट ने जिस तरह के सवाल उठाए हैं वो सीबीआई की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं. सीबीआई ने इस अहम तथ्य की अनदेखी क्यों की कि बिना ठोस सबूत के किसी को सजा नहीं दी जा सकती. महज अनुमान और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर कैसे उम्रकैद की सजा दी जा सकती है. सीबीआई ने एक कहानी बनाकर तलवार दंपति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और सीबीआई कोर्ट ने इस कहानी को मान भी लिया. 

आरुषि केस: राजेश और नुपुर तलवार की रिहाई आज, डासना जेल नहीं पहुंचा ऑर्डर

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तलवार दंपति की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी. शुरुआत में शक की सुई घर के नौकर हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से हेमराज की लाश भी बरामद हुई थी. यह मामला उस वक्त खूब सुर्खियों में छाया रहा था. जिसके बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी थी. तभी से यह मामला कोर्ट में चल रहा है.