इलाहाबाद। बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला सुनाया जिसे सुनकर तलवार दंपती भावुक हो गए और उनकी आंखें छलक पड़ी. टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक जैसे ही हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को बरी किया वो भावुक हो गए. गौरतलब है कि तलवार दंपती को सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और राजेश-नुपुर को बरी कर दिया हैै. वो इस वक्त गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं.

कल से बेचैन थे तलवार दंपती
फैसला आने से पहले तलवार दंपती काफी परेशान दिखे थे गाजियाबाद की डासना जेल में बंद राजेश और नुपुर तलवार को रात में नींद नहीं आई. दोनों ने सुबह का नाश्ता भी नहीं किया. बताया जा रहा है कि सुबह हेल्थ चेकअप के दौरान उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था. जेल सूत्रों के मुताबिक आम दिनों की तुलना में नुपूर ने दूसरे कैदियों से बातचीत नहीं की और गुमसुम बैठी रहीं.

आरुषि हत्याकांड: हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी, 1418 दिन जेल में काटे

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हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ये फैसला सुनाया. हाई कोर्ट ने तलवार दंपति के खिलाफ सबूतों को नाकाफी बताते हुए इन्हें बरी कर दिया. इसी के साथ ट्रायल कोर्ट की चार्जशीट खारिज हो चुकी है. कोर्ट का फैसला तलवार दंपति डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार के लिए बहुत बड़ी राहत हो जो 2013 से डासना जेल में बंद हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि जांच में कई तरह की खामियां हैं. ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता. संदेह के आधार पर दोनों को रिहा किया जाता है.  इन्हें जेल से तुरंत रिहा किया जाए.

नुपुर तलवार के पिता ने बयां की हालत
नुपुर तलवार के पिता ने आज कहा कि अपनी बेटी आरूषि की हत्या के नौ साल तक चले मुकदमे ने तलवार दंपती को भावना शून्य कर दिया और उन्हें बरी करने के लिए न्यायपालिका का शुक्रिया अदा किया. वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस ने कहा कि अपनी बेटी नुपूर और उसके पति राजेश को जेल में देखना उनके लिए बहुत कष्टकर था.

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस फैसले के लिए मैं न्यायपालिका का अभारी हूं.’’ उन्हें(तलवार दंपती को) मुसीबतों का सामना करना पड़ा. वे लोग भावना शून्य हो गए हैं. मेरे लिए उम्र के इस पड़ाव में अपनी बेटी को जेल में देखना बहुत कष्टकर था.’’ आरुषी की करीबी संबंधी वंदना तलवार ने कहा कि मुकदमा लंबा खींचने के चलते पूरा परिवार करीब एक दशक तक परेशान रहा.

 

क्या है आरुषि-हेमराज हत्याकांड?
मई 2008 में तलवार दंपति के नोएडा स्थित आवास पर उनकी बेटी आरुषि अपने कमरे में मृत मिली थी. उसकी हत्या गला काटकर की गई थी. शुरुआत में शक की सुई 45 वर्षीय घरेलू सहायक हेमराज की ओर घूमी थी क्योंकि घटना के बाद से वह लापता था. लेकिन दो दिन बाद हेमराज का शव भी बिल्डिंग की छत से मिला था. इस मामले में लापरवाहीपूर्ण तरीके से जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी. सीबीआई अदालत में 26 नवंबर 2013 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की.