गुवाहाटी: असम महिला विश्वविद्यालय (एडब्ल्यूयू) की छात्राएं स्थाई कुलपति की नियुक्ति करने और इसे पूरी तरह स्वायत्त विश्वविद्यालय बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं. एडब्ल्यूयू पूर्वोत्तर में अपनी तरह का पहला संस्थान है. छात्राएं पिछले सोमवार से यह आंदोलन कर रही हैं जिसके समर्थन में असम के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. छात्राओं का आरोप है कि सरकार अधिनियम को वापस लेकर इसका दर्जा कम करना चाहती है.

इस अधिनियम को 2013 में राज्य विधानसभा ने पारित किया था. जानकारी के मुताबिक कैबिनेट की अगली बैठक में इस विषय पर चर्चा हो सकती है. असम के उच्च शिक्षा प्रधान सचिव अजय तिवारी ने कहा, ‘‘इस मामले में सरकार ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है. चूंकि फिलहाल इस पर परिचर्चा चल रही है तो सरकार निश्चित तौर पर इस पर विचार करेगी.’’ तिवारी ने कहा, ‘‘ संभवत: कैबिनेट की अगली बैठक में यह मामला उठेगा. अगर कैबिनेट ने विश्वविद्यालय को खत्म करने का निर्णय किया तो फिर इसे विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी.’’

गौरतलब है कि असम महिला विश्वविद्यालय की छात्राएं विश्वविद्यालय को तकनीकी संस्थान में बदलने के विरोध को लेकर सोमवार से हड़ताल पर हैं. छात्राएं सरकार से ये मांग भी कर रही है कि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को स्थार्इ तौर नियुक्त किया जाए. इसके अलावा यूनिवर्सिटी के पूर्ण विकास के लिए बुनियादी ढ़ांचे और परर्मानेंट फैकल्टी स्टाफ की नियुक्ति की जाए. बता दें कि जोरहाट में डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस के सामने छात्राओं ने बैनर औरर पोस्टर्स के साथ सड़क पर बैठ कर भूख हड़ताल शुरू की.

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में अपने पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए हमें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि ये यूनिवर्सिटी सिर्फ नाम की है, न तो यहां पर कोर्इ बुनियादी ढ़ांचा है और न ही संस्थान को चलाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था है. छात्राओं ने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं पूरा किया तो वे आंदोलन शुरू करेंगे. इस विरोध प्रदर्शन में असम जिले के 176 कॉलेजों की स्टूडेंट्स शामिल हैं. छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है.