नई दिल्ली| अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को अगले लोकसभा चुनाव तक टालने की दलील देने वाले सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल लगातार घिरते जा रहे हैं. इस मामले पर बीजेपी के हमले के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी सिब्बल के रुख से असहमति जताई है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के हाजी महबूब ने कहा कि सिब्बल एक वकील होने के साथ ही एक नेता भी हैं. सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलील गलत थी. हम जल्द से जल्द इस मसले का हल चाहते हैं. कपिल सिब्बल ने अदालत से मांग की थी कि 2019 के लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक इस विवाद पर सुनवाई टाल दी जाए.

वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह साफ़ किया है कि अदालत में सिब्बल ने जो कहा वह उनकी निजी राय थी और वह एक नेता की तरह बात कर रहे थे.

इस मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कांग्रेस से कहा कि वह राम जन्मभूमि मुद्दे पर अपना रुख साफ करे. शाह ने कांग्रेस पर ‘‘दोहरा रवैया’’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में ‘‘मंदिरों का चुनावी दौरा’’ कर रहे हैं जबकि दूसरी तरफ उनकी पार्टी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई को टालना चाह रही है. वहीं, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैली में भी कपिल सिब्बल को निशाने पर लिया.

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि उनकी पार्टी यह निरंतर कहती आई है कि सरकार और राजनीतिक दलों को उच्चतम न्यायालय से सलाह करने के बाद जल्द से जल्द राम जन्मभूमि मुद्दे पर फैसला करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस संबंध में शीर्ष अदालत का आदेश सभी को स्वीकार्य होना चाहिए. उन्होंने सिब्बल की मांग को उनकी निजी राय करार दिया.