बदरीनाथ। शुक्रवार दोपहर हुए भूस्खलन के बाद से  बंद बद्रीनाथ हाईवे खुल गया है। बीआरओ की टीम ने रात भर पत्‍थर ‌हटाने का काम किया। रास्ता खुलने से या‌त्रियों को राहत मिली है। करीब 30 घंटे बाद यह रास्ता खुला।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल छोटे वाहनों के ल‌िए रास्ता खोल द‌िया गया है। वहीं बड़े वाहनों के ल‌िए भी रास्ता खोलने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। बद्रीनाथ हाईवे पर हाथी पर्वत के पास भारी चट्टानें दरकने से रास्ते पर काफी भारी मात्रा में पत्थर और मलबा जमा हो गया था। इस प्राकृतिक आपदा में करीब 30 हजार लोग फंसे थे। शासन प्रशासन ने उनके खाने पीने की व्यवस्था कराई थी।

बीआरओ को 30 घंटे बाद मिली सफलता, चलता रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मी चौबीसों घंटे विष्णुप्रयाग के निकट हाथीपहाड़ मार्ग से मलबा हटाने के काम में लगे हुए हैं। अब तक लगभग 250 तीर्थयात्रियों को भूस्खलन वाले मार्ग से बाहर निकाला जा चुका है। मार्ग के दोनों ओर फंसे हजारों लोगों को विभिन्न जगहों पर ठहरने के लिए और उनसे बाहर नहीं निकलने के लिए कहा गया है।

प्राकृतिक आपदा विभाग के सचिव ने कहा कि सभी लोग सुरक्षित हैं और चिंता करने की कोई बात नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि मार्ग के दोनों तरफ खाने तथा ठहरने की व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड सरकार ने तीर्थयात्रियों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन संख्या जारी किए हैं, ताकि वे तीर्थयात्रा पर आए अपने प्रियजनों की खोज-खबर ले सकें।

बारिश के बाद भूस्खलन, बंद हुआ हाईवे और फंस गई हजारों जिन्दगी

चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश यात्रियों के लिए मुसीबत बनकर बरसी। विष्णुप्रयाग के पास हाथीपहाड़ में भूस्खलन से बद्रीनाथ हाईवे बंद हो गया। शुरूआत में मिली सूचना में 15 हजार यात्री फंसे होने का दावा किया गया लेकिन समय बीतते-बीतते यह आंकड़ा तीस हजार के बार पहुंच गया। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 2016 में उभरा हाथीपहाड़ भूस्खलन जोन पर पहाड़ी खिसकने से यह हाईवे एक बार फिर बाधित हुआ।

शुक्रवार दोपहर के वक्त हाथीपहाड़ में चट्टान से हाईवे पर पत्थर गिरने शुरू हुए थे। जानकारी मिलते ही दोपहर करीब ढाई बजे प्रशासन ने पर्यटकों और यात्रियों के वाहनों को रोकना शुरू किया। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे हाथीपहाड़ में अचानक चट्टान टूटकर गिरने के बाद हाईवे का 50 मीटर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

हाथीपहाड़ में दोनों छोरों पर 500 से अधिक छोटे बड़े वाहन फंस गए। बद्रीनाथ धाम में फंसे यात्रियों को फिलहाल वहीं रुकने के लिए कहा गया। जबकि बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों को जोशीमठ, पीपलकोटी, चमोली सहित अन्य स्थानों पर रुकने के लिए कहा गया।