लखनऊ| राहुल गांधी को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाने को लेकर पार्टी के अंदर तेज होते स्वरों के बीच बीजेपी, नेहरू-गांधी परिवार की ‘म्यूटेशन वाली सीट’ अमेठी में राहुल की चूलें हिलाकर इस पार्टी के मनोबल को गहरी चोट देने की कोशिश में है. गुजरात में भगवा शासन को ललकार रहे राहुल की अमेठी को लेकर बीजेपी की आक्रामकता कुछ यही इशारा करती है.

राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक, राहुल गुजरात जाकर सत्ताधारी दल पर जो प्रहार कर रहे हैं, बीजेपी अमेठी में उसकी जवाबी चोट दे रही है. पिछली 10 अक्तूबर को अमेठी में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गत लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से राहुल को कड़ी टक्कर देने वाली केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का कार्यक्रम इसी मकसद से हुआ, ताकि राहुल को गुजरात का जवाब अमेठी से दिया जाए.

बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम मंत्री का जवाब
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के वक्फ राज्यमंत्री और अमेठी के प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने गुजरात का जवाब अमेठी से देने की बीजेपी की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर बताया कि अमेठी तो कांग्रेस के लिये ‘म्यूटेशन’ वाली सीट है. दादी से लेकर पापा और पापा से लेकर बेटा तक इस सीट से संसद पहुंचे हैं. इस बार अमेठी लोकसभा क्षेत्र की जनता पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में जाती दिख रही है. आने वाले समय में हम अमेठी में और अधिक सक्रियता दिखाएंगे.

रजा ने कहा कि प्रभारी मंत्री के रूप में उन्होंने अमेठी की दुर्दशा देखी है. कोई चुनाव ना होने के बावजूद इतनी बड़ी भीड़ का अमित शाह को सुनने के लिये पहुंचना, यह जाहिर करता है कि राहुल गांधी को अमेठी की अवाम ने ‘खुदा हाफिज’ कह दिया है. शायद इसीलिये ऐसे संकेत हैं कि राहुल चुनाव लड़ने के लिये कर्नाटक में कोई सीट तलाश रहे हैं.

amit-shah-in-amethi-rally-with-smriti-irani-and-yogi-adityanath | अमेठी में राहुल की ‘गुजरात पॉलिटिक्स’ का जवाब देंगे अमित शाह, साथ होंगे योगी

amit-shah-in-amethi-rally-with-smriti-irani-and-yogi-adityanath | अमेठी में राहुल की ‘गुजरात पॉलिटिक्स’ का जवाब देंगे अमित शाह, साथ होंगे योगी

रजा की बात पर अगर यकीन करें तो यदि राहुल अमेठी को छोड़कर कहीं और से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित रूप से इसका अच्छा संदेश नहीं जाएगा. यह इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि राहुल को अब पार्टी अध्यक्ष बनाने की कवायद तेज हो गयी है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कल राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने सम्बन्धी आग्रह का प्रस्ताव भी पारित किया है.

राहुल जहां गुजरात में विकास के मुद्दे पर बीजेपी को घेर रहे हैं, वहीं शाह अमेठी की जनता की तरफ से राहुल से पिछली तीन पीढ़ियों का हिसाब मांग रहे हैं. बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके विकास पर तंज करने वाले राहुल और उनके परिवार ने आखिर अपने गढ़ अमेठी को तरक्की के नाम पर क्या दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अमेठी निश्चित रूप से बीजेपी के लिये बड़ा मंसूबा है और वह पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल को चौंकाने वाली स्थितियों को पैदा करने के बाद अब उन्हें सर-ए-अंजाम पर पहुंचाना चाहती है. हार के बावजूद स्मृति ईरानी की अमेठी में लगातार सक्रियता और बीजेपी अध्यक्ष का यह कहना, कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन बिंदुओं पर चुनाव नहीं लड़ेगी कि वह यहां कौन-कौन से विकास कार्य करेगी, बल्कि इस बुनियाद पर लड़ेगी कि उसने यहां अब तक क्या-क्या विकास कार्य कर डाले हैं.

गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में स्मृति को बहुत कम समय रहते अमेठी से बीजेपी का उम्मीदवार बनाया गया था. हालांकि वह हार गयीं लेकिन राहुल के जीत के अंतर में वर्ष 2009 के मुकाबले दो लाख से ज्यादा मतों की गिरावट ने बीजेपी को नेहरू-गांधी परिवार के गढ़ में सेंध लगाने की उम्मीद जरूर दे दी.

स्मृति चुनाव जरूर हार गयीं लेकिन उन्होंने अमेठी की जनता से वादा किया था कि वह उससे अपना नाता नहीं तोड़ेंगी. पिछले साढ़े तीन साल के दौरान स्मृति ने अमेठी के लगातार दौरे किये और केन्द्र की अनेक योजनाओं को पहुंचाकर अपनी जमीन तैयार करती रहीं. वर्ष 2019 में अमेठी से चुनाव लड़ने पर उनकी उम्मीदवारी पांच साल पुरानी होगी.