कानपुर: राज्यसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी की हार के लिए मायावती द्वारा बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाने के बाद शनिवार शाम भाजपा नेताओं ने सपा-बसपा गठबंधन पर जमकर निशाना साधा. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार को सपा-बसपा गठजोड़ पर हमला बोला. पत्रकारों से बातचीत में मौर्य ने कहा कि अखिलेश जो कभी अपने पिता (मुलायम सिंह) और चाचा (शिवपाल) के प्रति वफादार नहीं रहे, वह कभी भी ‘बुआ’ (मायावती) के प्रति भी वफादार नही रहेंगे.

उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा, नरेंद्र मोदी और योगी को रोकने के लिये जो सपा-बसपा गठबंधन बनाया गया था, वह पूरी तरह से फेल हो गया है. भाजपा ने 10 सीटों में से 9 सीटों पर विजय प्राप्त कर इतिहास बना दिया. मौर्य ने कहा, ‘ हम कह सकते हैं कि 2014 में जो हमारी जीत हुई थी, वह 2019 में भी दोहराई जाएगी और नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनेंगे.’ उन्होंने कहा कि योगी सरकार पिछले 15 साल में सपा-बसपा द्वारा किए गए गुनाहों को साफ करने की कोशिश कर रही है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाने वाले मायावती के बयान की कड़ी आलोचना की. सिंह ने कहा कि मायावतीजी को अखिलेश यादव से वह रिटर्न गिफ्ट नहीं मिल सका, जिसकी उन्हें अपेक्षा थी. निराशा में वो निराधार आरोप लगा रही हैं और खुद हंसी का पात्र बन रही हैं.

मंत्री ने आगे बताया कि जब बसपा के विधायक एनडीए उम्मीदवार को वोट देते हैं तो वे खरीद-खरोफ्त का नाम देती हैं, लेकिन जब भाजपा समर्थक विधायक उनके उम्मीदवार को वोट देता है, तो इसे विवेक का इस्तेमाल बताती हैं. चुनावों के संचालन में पूरी पारदर्शिता रही, इसलिए ऐसे आरोपों का कोई मतलब नहीं है.

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए भाजपा के जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि हार के बाद बसपा एक के बाद एक बहाने बना रही है. उसके पास तो पर्याप्त संख्या में विधायक ही नहीं थे. उसने सपा से नजदीकियां बढ़ाकर वोट जुटाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. सपा के वोट बसपा प्रत्याशी को नहीं मिले. खरीद-फरोख्त का आरोप पूरी तरह निराधार है.

इससे पहले शनिवार शाम प्रेस कांफ्रेंस कर बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा चुनावों के बाद मीडियाकर्मियों से पहली बार बातचीत की. उन्होंने चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर की हार के लिए भाजपा द्वारा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग तथा खरीद-फरोख्त को जिम्मेदार बताया. मायावती ने यह भी कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके उम्मीदवार को जिताने की हरसंभव कोशिश की, कांग्रेस ने भी समर्थन दिया, लेकिन भाजपा की साजिश के चलते सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए.