नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से अपनी अपनी ही पार्टी की यूपी सरकार के शासन के दौरान दलितों के बड़े पैमाने पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले बीजेपी सांसद उदित राज के सुर रविवार को बदल गए गए. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी दलितों को अपने साथ बने रहने के लिए मना लेगी.  बीजेपी सांसद ने  ट्वीट किया है, ”मेरे ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है कि उनसे भाजपा को नुकसान हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है. उनसे पार्टी मजबूत हो रही है. बता दें कि बीजेपी सांसद ने शनिवार को ही आरोप लगाया था कि दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसक प्रदर्शन के बाद दलित समुदाय के लोगों को व्यापक पैमाने पर प्रताड़ित किया जा रहा है. उत्तर पश्चिम दिल्ली से दलित सांसद उदित राज ने यह भी कहा कि वह अपनी पार्टी के खिलाफ नहीं है और सरकार दलित विरोधी अधिकारियों और लोगों पर नियंत्रण रखेगी.

मेरे ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा
बीजेपी सांसद ने ट्वीट किया है, ”मेरे ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है कि उनसे भाजपा को नुकसान हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है. उनसे पार्टी मजबूत हो रही है, क्योंकि भाजपा में मेरे जैसे भी कुछ लोग हैं, जो दो अप्रैल के प्रदर्शन के बाद दलितों पर हो रहे अत्याचार को लेकर चिंतित हैं. यह दलितों को पार्टी के साथ बने रहने में मदद करेगा. सरकार दलित विरोधी अधिकारियों और लोगों पर नियंत्रण रखेगी.”

एक दिन पहले ये लगाया था आरोप
बीजेपी सांसद उदित राज ने शनिवार को रात आरोप लगाया था कि इस सप्ताह के शुरू में भारत बंद के दौरान हिंसक प्रदर्शन के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में उनके दलित समुदाय के सदस्यों को प्रताड़ित किया जा रहा है. उदित राज ने एक ट्वीट में कहा था, ”दो अप्रैल को हुए आंदोलन में हिस्सा लेने वाले दलितों पर अत्याचार की खबरें मिल रही है और यह रुकना चाहिए.” उन्होंने कहा था कि दो अप्रैल के बाद दलितों को देशभर में प्रताड़ित किया जा रहा है, बाडमेर, जालौर, जयपुर, ग्वालियर, मेरठ, बुलंदशहर, करौली और अन्य स्थानों के लोगों के साथ ऐसा हो रहा है. न केवल आरक्षण विरोधी बल्कि, पुलिस भी उन लोगों को पीट रही है. फर्जी मामले लगा रही है. ”

ग्वालियर में कार्यकर्ता को प्रताड़ित किया गया
उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट से सांसद उदित राज ने ये भी आरोप लगाया था कि ग्वालियर में उनके द्वारा चलाये जा रहे दलित संगठन के एक कार्यकर्ता को प्रताड़ित किया गया. हालांकि उसने कुछ भी गलत नहीं किया था. बता दें कि अनुसूचित जाति / जनजाति ( अत्याचार निवारण ) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर किए जाने के खिलाफ दो अप्रैल को किए गए भारत बंद के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे.

(इनपुट एजेंसी)