नई दिल्ली: राज्यसभा में संख्याबल के मामले में भले ही बीजेपी की 11 सीटें बढ़ गई हैं, लेकिन अब भी वह बहुमत से दूर है. हाल ही में उसे चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगू देशम ने झटका दिया है, लेकिन भाजपा को नई संभावना दिखाई दे रही है, जिस पर वह काम कर सकती है. बीजेपी राज्यसभा में बिल पास कराने के लिए अब ऐसे छोटे और क्षेत्रीय दलों की मदद ले सकती है, जो यूपीए गठबंधन में शामिल नहीं हैं. राज्यसभा की 58 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनावों के नतीजे आने के बाद सदन में अब भाजपा के खाते में 11 सीटों की वृद्धि हुई है, जबकि कांग्रेस ने अपनी 4 सीटें खो दीं हैं. इसके साथ ही अब संसद के उच्च सदन में बीजेपी करीबी प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले काफी मजबूत हो गई है.

शुक्रवार को हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के 28 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. इस तरह से बीजेपी को 11 सीटों का फायदा हुआ है, तो वहीं, कांग्रेस ने केवल 10 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि पहले उसका इनमें से 14 सीटों पर कब्जा था. इस तरह पार्टी को 4 सीटों का नुकसान हुआ है. नए सांसदों का शपथ ग्रहण अगले हफ्ते होगा.

आंकड़ों में देखें तो 245 सदस्यीय उच्च सदन में अब बीजेपी की सीटों की संख्या मौजूदा 58 से बढ़कर 69 हो जाएगी और कांग्रेस की सीटें अब 54 से गिरकर 50 रह जाएंगी. हालांकि, भाजपा नीत गठबंधन एनडीए राज्यसभा में बहुमत से अब भी दूर है.
पार्टी को अभी हाल ही में एक झटका लगा है, जो पिछले 4 साल से उसकी सहयोगी रही तेलुगु देशम पार्टी ने उससे नाता तोड़ लिया. सदन में इस समय टीडीपी के छह सदस्य हैं. वहीं, बीजेपी सूत्रों ने बताया कि सरकार अब सदन में पहले से काफी आसान स्थिति में है, क्योंकि सरकार के विधायी एजेंडे पर अनाद्रमुक, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी जैसे एनडीए के बाहर वाले क्षेत्रीय दलों के उसे समर्थन मिलने की संभावना है.

बहरहाल, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे अपने प्रमुख विपक्षी दलों की संख्या में गिरावट से बीजेपी खेमा काफी उत्साहित है. एसपी की झोली में केवल एक सीट आई है, जबकि सदन में उसके 6 सदस्यों का कार्यकाल अब खत्म होने जा रहा है. बीजेपी सूत्रों ने बताया कि सरकार अब सदन में पहले से काफी आसान स्थिति में है, क्योंकि सरकार के विधायी एजेंडे पर अनाद्रमुक, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी जैसे एनडीए के बाहर वाले क्षेत्रीय दलों के उसे समर्थन मिलने की संभावना है.

पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण मोदी सरकार द्वारा लाए गए बिल लोकसभा में पारित हो जाने के बावजूद राज्यसभा में आकर अक्सर अटक जाते हैं. लोकसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है. राज्यसभा में विपक्षी दलों के एकजुट हो जाने से मोदी सरकार को विधेयक पारित कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली अप्रत्याशित जीत से उसे सदन में अपनी संख्या बढ़ाने में मदद मिली है, जबकि कांग्रेस के हाथ से कई राज्यों की सत्ता जाने के बाद उसकी स्थित सदन में लगातार कमजोर होती जा रही है. (इनपुट-एजेंसी)