नई दिल्लीः आने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी एसटी नेता और लोकसभा सांसद बी श्रीरामुलु को डिप्टी सीएम के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकती है. यह कदम कांग्रेस के कोर वोटर रहे दलित और आदिवासियों को लुभाने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है. गौरतलब है कि राज्य में दलितों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत के करीब है. राज्य की तीन प्रमुख पार्टियां कांग्रेस, बीजेपी और जनता दल (एस) दलितों को अपने पाले में करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रही हैं.

बीजेपी के नेता का कहना है कि लिंगायत समुदाय के बीएस येदुरप्पा और एसटी नेता श्रीरामुलु को डिप्टी सीएम के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट बीजेपी कर्नाटक में जीत की राह को आसान बना सकती है. श्रीरामुलु वाल्मीकि नयका समुदाय से आते हैं जिसकी आबादी लगभग 25 लाख के आसपास है और यह पूरे राज्य में फैली हुई है.

‘जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार’
बीजेपी ने अपने सांसद श्रीरामुलु को रिजर्व सीट मोलकालमुरु विधानसभा से टिकट दिया है. श्रीरामुलु का कहना है कि वह पार्टी की ओर से दी जाने वाली किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी को जीत दिलाने और बीएस येद्दयुरप्पा को सीएम बनाने के लिए एसटी/एससी की 31 रिजर्व सीटों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुझे पार्टी की तरफ से कोई गिफ्ट नहीं चाहिए, लेकिन अगर पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी मैं उसे निभाने के लिए तैयार हूं.

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इमेज बदलना चाहती है बीजेपी
श्रीरामुलु को डिप्टी सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर बीजेपी अपनी अपर कास्ट इमेज को भी बदलना चाहती है. बीजेपी के एसटी-एससी मोर्चा के राज्य अध्यक्ष और एमएलसी डीसी वीरैया का कहना है कि किसी किसी दलित को डिप्टी सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करना पार्टी के लिए फायदे का सौदा होगा. उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि अब हम ऐसा करें.

राह नहीं आसान
दलितों का एक तबका मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाता रहा है. ऐसे में बीजेपी के के लिए दलित को डिप्टी सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करना फायदे का सौदा हो सकता है. हालांकि श्रीरामुलु की राह उतनी भी आसान नहीं है. बीजेपी में कई सीनियर नेता हैं जो डिप्टी सीएम के तौर पर दावेदारी पेश कर सकते हैं. उन्हें दरकिनार करने पर पार्टी में बगावत भी हो सकती है.

छोड़ दी थी बीजेपी
गौरतलब है कि श्रीरामुलु ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी के साथ की थी. 1999 में पहली बार वह एक चेहरे के तौर पर उभरे बेल्लारी से एमएलए का चुनाव जीता और उसके बाद मंत्री बने. हालांकि उन्होंने 2013 में बीजेपी छोड़ दी थी और बीएसआर कांग्रेस का गठन कर लिया था. 2014 में बीजेपी ने उन्हें सांसद का टिकट ऑफर किया इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर लिया और पार्टी में शामिल हो गए.