लखनऊ: एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में हुए दलित संगठनों के भारत बंद के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) डैमेज कंट्रोल के मोड में है. बीजेपी ने तय किया है कि 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के हर जिले में जश्न मनाकर बाबा साहेब को याद किया जाएगा. केंद्र सरकार पर एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए 2 अप्रैल को देशभर में कई दलित संगठनों ने भारत बंद कर विरोध प्रदर्शन किया था. हालांकि बीजेपी ने साफ किया है कि कोर्ट के फैसले में उसका कोई रोल नहीं है और वो एससी/एसटी एक्ट को कमजोर किए जाने के सख्त खिलाफ है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बार बार इस बात को स्पष्ट किया है कि आरक्षण को लेकर उनकी राय एकदम साफ है कि इसे बने रहना चाहिए. कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने कोर्ट में याचिका डाल कर कोर्ट से अपने निर्णय पर पुनविचार का भी आग्रह किया है जिसपर पहली सुनवाई में तो कोर्ट ने अपने फैसले में बदलाव से मना कर दिया लेकिन ये कहा है कि आगे मामले की विस्तृत सुनवाई होगी. विपक्ष भी डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयन्ती मनाने की तैयारियों में जुटा है और इसी के बीच उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा ने बाबा साहब के जन्मदिन पर प्रदेश में जगह-जगह भव्य समारोहों का आयोजन करने की योजना बनाई है.

उत्तर प्रदेश भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष सांसद कौशल किशोर ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि संविधान निर्माता डॉक्टर आंबेडकर की जयन्ती पर भाजपा कार्यकर्ता विभिन्न जिलों में पदयात्रा निकालेंगे. उन्होंने कहा कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बाबा साहब के अभियान को आगे बढ़ाया गया है. सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों में दलितों की बड़ी संख्या है. बसपा मुखिया मायावती इस आशंका से भयभीत हैं कि कहीं भाजपा की नीतियों और कार्यों के कारण दलितों में उनका आधार कम ना हो जाए.

मोहनलाल गंज से भाजपा सांसद किशोर ने कहा कि अगर सरकार दलितों का आरक्षण खत्म करना चाहती तो फिर वह अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा दिेए गए फैसले पर पुनर्विचार की याचिका क्यों दाखिल करती. इस बीच, आंबेडकर महासभा द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र अवार्ड से सम्मानित किए जाने का भी प्रस्ताव है. बहरहाल, महासभा के अध्यक्ष लालजी निर्मल ने बताया कि हालांकि मुख्यमंत्री ने अभी इस पर सहमति नहीं दी है.