नई दिल्ली: बजट सत्र में लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. बजट सत्र के दूसरे हिस्से में निचले सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई. सत्र का प्रारंभ 29 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुआ था.

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दूसरे चरण में लगातार बने रहे गतिरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘मैं केवल इतना कहना चाहती हूं कि यह सभा सदस्यों के लिए जनहित तथा लोक कल्याण के मुद्दों को उठाने हेतु सर्वाधिक पवित्र मंच है. मैं सदस्यों द्वारा अपने अपने-अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों को उठाने से संबंधित उनकी चिंताओं को समझती हूं, लेकिन उन्हें देश के व्यापक हितों को भी ध्यान में रखना होगा.’’ उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से यह प्रयास रहा है कि सदस्यों को सभा में मुद्दों को उठाने का अवसर मिले.

127 घंटे 45 मिनट बाधित रहा सदन
अध्यक्ष ने कहा कि व्यवधानों और विभिन्न कारणों से सत्र के दौरान 127 घंटे और 45 मिनट तक सदन में कार्य बाधित रहा. सभा ने नौ घंटे और 47 मिनट देर तक बैठकर अविलम्बनीय सरकारी कार्य भी पूरा किया. बजट सत्र के दौरान कुल 29 बैठकें हुईं जो 34 घंटे और पांच मिनट तक चलीं. इनमें से सात बैठकें सत्र के पहले भाग और 22 बैठकें सत्र के दूसरे भाग में हुईं. इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी हुई. यह 10 घंटे और 43 मिनट चली. चर्चा के बाद सात फरवरी, 2018 को धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ. केंद्रीय बजट पर चर्चा सात और आठ फरवरी को हुई जो 12 घंटे 13 मिनट तक चली. सभा नौ फरवरी, 2018 को स्थगित की गई ताकि स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों की जांच कर सकें और उन पर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकें.

बजट को मंजूरी, लेकिन हर दिन केवल 0.58 प्रश्नों के जवाब
पहले चरण के समापन के बाद सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत पांच मार्च को हुई. दूसरे भाग के दौरान वर्ष 2018-19 के लिए आम बजट के संबंध में रेल सहित सभी मंत्रालयों की अनुदानों की मांगों को सभा में मतदान के लिए रखा गया और 14 मार्च 2018 को इन्हें स्वीकृत किया गया तथा संबंधित विनियोग विधेयक एवं वित्त विधेयक पारित किया. वर्ष 2017-18 के लिए अनुदानों की पूरक मांगों के चौथे बैच को पारित किया गया और संबंधित विनियोग विधेयक पारित किया गया. बजट सत्र के दौरान पांच सरकारी विधेयक पेश किए गए. वित्त विधेयक-2018, उपदान संदाय (संशोधन) विधेयक-2017 और विनिर्दिष्ट अनुतोष (संशोधन) विधेयक-2017 जैसे कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए.

सत्र के दौरान 580 तारांकित प्रश्न किए गए जिनमें से 17 प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए. इस प्रकार प्रतिदिन औसतन 0.58 प्रश्नों के उत्तर दिए गए. शेष तारांकित प्रश्नों के लिखित उत्तर, 6670 अतारांकित प्रश्नों के उत्तरों के साथ सभा के पटल पर रखे गए. सदस्यों ने नियम 377 के अधीन 238 मामले उठाए. इस सत्र के दौरान विभागों से संबंद्ध स्थायी समितियों ने 61 प्रतिवेदन प्रस्तुत किए. मंत्रियों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर 43 बयान (नियम 199 के अधीन एक बयान और संसदीय कार्य मंत्री के 3 बयान) दिए गए. सत्र के दौरान संबंधित मंत्रियों द्वारा कुल 1185 पत्र सभा पटल पर रखे गए.

राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन का हुआ आयोजन
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ सकारात्मक पहलू के रूप में मैं यहां विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगी कि सभा में गतिरोध होते हुए भी मुझे राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन 10 और 11 मार्च को आयोजित करने में सभी दलों का सहयोग प्राप्त हुआ. इस सम्मेलन का विषय ‘विकास संकल्पित हम’ था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया.’’ उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान संसद और राज्य विधान मंडलों के सदस्यों तथा नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अन्य सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और देश के अकांक्षापूर्ण जिलों में कल्याणकारी कदमों के बारे में सार्थक चर्चाएं कीं. यह इस तथ्य को रेखांकित करती है कि जब भी जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों की बात आती है तब राजनीतिक मतभेदों से परे विधानमंडलों के सदस्यों एवं सांसदों का भ्रातृत्व उभरकर सामने आता है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सकारात्मक कदमों की बात आगे बढ़ाते हुए वह कहना चाहती हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा चार अप्रैल को वेस्टर्न कोर्ट एनेक्सी भवन का लोकार्पण किया गया. इस भवन की संरचना अपने आप में अत्याधुनिक है. इसके निर्माण को निर्धारित समयसीमा से छह माह पहले ही पूर्ण कर लिया गया ताकि यह अगली लोकसभा के लिए आम चुनाव के बाद विशेष रूप से नवनिर्वाचित सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण आवास की सुविधा प्रदान करने में बहुत उपयोगी सिद्ध होगा. उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पर भी विचार कर रहे हैं कि यह नया भवन सदस्यों के अतिथियों और पूर्व सदस्यों के लिए भी कैसे उपयोगी सिद्ध हो सकता है.’’