नई दिल्ली/चेन्नई: कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन में हो रही देरी को लेकर तमिलनाडु ने केंद्र सरकार के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में अवमानना की याचिका दायर की है, वहीं, केंद्र सरकार ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट से कुछ महीने की मोहलत मांगी है. तमिलनाडु सरकार कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन जल्द चाहती है ताकि उस राज्य में राजनीतिक खमियाजा नहीं भुगतना पड़े क्योंकि इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल डीएमके उठा रहा है.

केंद्र सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के ‘कावेरी प्रबंधन बोर्ड’ के गठन के आदेश के संदर्भ में कर्नाटक विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कोर्ट से तीन महीने की मोहलत मांगी है. केंद्र का मानना है कि विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम की धारा 6 (ए) के तहत किसी योजना के गठन और उसकी अधिसूचना से जनता में आक्रोश पैदा होगा, चुनावी प्रक्रिया में बाधा आएगी और कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होगी. वहीं, दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार ने कावेरी बोर्ड और ‘कावेरी जल नियामक कमेटी’ (सीडब्ल्यूआरसी) के गठन का कोर्ट का आदेश नहीं मानने पर केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की है.

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि केंद्र सरकार जानबूझ कर कोर्ट के आदेश को टाल रही है और उस पर अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए. तमिलनाडु ने अपनी याचिका में कहा, “माननीय न्यायालय के 16 फरवरी के आदेश को जानबूझ कर न मानने पर केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.”

6 हफ्ते बाद केंद्र ने जमा किया हलफनामा
कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी नियामक कमेटी के गठन के लिए 16 फरवरी को न्यायालय से मिली 6 सप्ताह की समयसीमा के शुक्रवार को समाप्त होने के एक दिन बाद न्यायालय में एक हलफनामा के जरिए केंद्र ने कहा है कि योजना गठित करने को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु समेत चार राज्य सरकारों द्वारा व्यक्त की गई अलग-अलग राय के कारण यह महसूस किया गया कि यदि केंद्र सरकार खुद से कोई योजना लाती है, तो राज्य फिर से कोर्ट जाएंगे.केंद्र ने केरल और कर्नाटक सरकारों के रुख का जिक्र किया है, जिनमें कहा गया है कि अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तावित किसी भी योजना को अधिसूचित करने से पहले उसे उनके साथ साझा किया जाए.

कर्नाटक चुनाव में कानून व्यवस्था बिगड़ने का डर
चुनाव आयोग द्वारा कर्नाटक में चुनाव की घोषणा का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा, “कावेरी मुद्दा कर्नाटक के लोगों की भावनाओं से जुड़ा है और इस मुद्दे के कारण पहले भी कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ है.”

केंद्र सरकार को बदलाव करने की छूट पर सवाल
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के जरिए स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या केंद्र सरकार धारा 6 (ए) के अंतर्गत कावेरी प्रबंधन बोर्ड के संबंध में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण की रिपोर्ट की सिफारिशों से अलग योजना बना सकती है? याचिका में यह भी पूछा गया है कि न्यायाधिकरण ने जिस बोर्ड के गठन की सिफारिश की है, क्या केंद्र सरकार को बोर्ड की संरचना में इस तरह का बदलाव करने की छूट होगी कि उसे विशुद्ध रूप से एक तकनीकी संस्था बनाने के बदले प्रशासनिक और तकनीकी, यानी एक मिश्रित संस्था बनाई जाए, ताकि बोर्ड का कामकाज प्रभावी रूप से संचालित हो सके?

तमिलनाडु ने बोर्ड के गठन में देरी को बताया अन्याय
तमिलनाडु ने केंद्र पर इस संबंध में कोई ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए कहा, “कोर्ट के आदेश की 6 हफ्ते की समयसीमा के 3 सप्ताह बीतने के बाद केंद्र ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी के मुख्य सचिवों की सिर्फ एक बैठक आयोजित की.” याचिका में कहा गया है कि कावेरी बोर्ड और कावेरी नियामक कमेटी के गठन के मामले में ऐसी बैठक से कोई खास प्रगति नहीं होती है. तमिलनाडु ने कहा, “कावेरी बोर्ड और कावेरी नियामक कमेटी के गठन में होने वाला विलंब तमिलनाडु के किसानों के साथ अन्याय है.”

 तमिलनाडु के मंत्री कावेरी मुद्दे पर करेंगे अनशन
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कावेरी जल विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. सत्ताधारी अन्नाद्रमुक के लिए कावेरी मुद्दा परेशानी का सबब बनते जा रहा है. हालांकि, राज्य सरकार का केंद्र के साथ संबंध काफी हद तक मैत्रीपूर्ण ही रहा है. आखिरकार पार्टी ने शुक्रवार को घोषणा की कि सरकार अगले हफ्ते इसको लेकर भूख हड़ताल करेगी.

मदुरै में पार्टी द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह के दौरान अन्नाद्रमुक समन्वयक पनीरसेल्वम ने पार्टी के सह- समन्वयक पलानीसामी के साथ इसकी घोषणा की. तमिलनाडु में मुख्यमंत्री के. पलानीसामी और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम को छोड़कर अन्नाद्रमुक सरकार की पूरी कैबिनेट कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) के गठन की मांग को लेकर 3 अप्रैल को होने वाले अनशन में भाग लेगी.

ये मंत्री करेंगे अनशन 
पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, वन मंत्री डिंडीगुल सी श्रीनिवासन, स्कूली शिक्षा मंत्री केए सेंगोतैयन, बिजली मंत्री पी थंगमणि, मत्स्य पालन मंत्री डी जयकुमार और नगरीय प्रशासन मंत्री एसपी वेलुमणि के साथ ही कई अन्य मंत्री राज्य भर में विभिन्न जगहों पर आयोजित होने वाले अनशन में भाग लेंगे.

32 जिलों में विरोध प्रदर्शन, पुडुचेरी में भी अनशन
पार्टी ने पड़ोसी केंद्र शासित क्षेत्र पुडुचेरी में अनशन करने के लिए वहां के विधायक समेत अपने 7 पदाधिकारियों को नामित किया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विभिन्न विभागों के प्रमुखों, सांसदों और विधायकों के नाम भी पार्टी द्वारा जारी सूची में शामिल हैं. केंद्र से सीएमबी और केंद्रीय जल नियामक समिति( सीडब्ल्यूआरसी) गठित करने की मांग को लेकर पुडुचेरी के अलावा तमिलनाडु के सभी 32 जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे.
(इनपुट एजेंसी)