अहमदाबाद: सीबीआई की एक विशेष अदालत ने इशरत जहां कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के दो अधिकारियों के लिए जारी किए गए समन रद्द कर दिए हैं. विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश जे बी पांड्या ने राजीव वानखेडे और टी एस मित्तल को समन जारी करने के निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया. दोनों जून, 2004 में हुए कथित फर्जी मुठभेड़ के समय सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी थे. दोनों अधिकारियों ने उन्हें जारी किए सम्मन को चुनौती दी थी.

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने आईबी के दो और अधिकारियों-विशेष निदेशक राजेंद्र कुमार और अधिकारी एम.एस. सिन्हा को भी सम्मन जारी किया था, लेकिन उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत में उन्हें चुनौती नहीं दी. सीबीआई ने चारों अधिकारियों पर हत्या, आपराधिक साजिश, अवैध रूप से हिरासत में रखने और अपहरण के आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया है. वानखेड़े और मित्तल ने सीबीआई की अदालत में कहा कि सम्मन बरकरार रखे जाने योग्य नहीं हैं क्योंकि अदालत ने सीबीआई के आरोपपत्र पर संज्ञान नहीं लिया था.

यह मामला 15 जून 2004 का है. डीआईजी डी.जी.वंजारा के नेतृत्व वाले पुलिस दल की कार्रवाई की सत्यता पर दावों-प्रतिदावों की झड़ियां लग गई थीं. कम से कम दो ऐसी जांच हैं जो बताती हैं कि इशरत आतंकी नहीं थी. उसे फर्जी मुठभेड़ में नृशंस तरीके से मारा गया था. जब यह मुठभेड़ हुई थी, उस वक्त भाजपा के आज के अध्यक्ष अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे. जांच के नतीजे सामने आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. कुछ महीने वह जेल में भी रहे थे. उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन अदालत ने उनसे गुजरात से बाहर रहने के लिए कहा था.