नई दिल्ली: सीबीएसई की दसवीं के मैथ्स और बारहवीं कक्षा के इकोनॉमिक्स का क्वेश्चन पेपर लीक होने के बाद बोर्ड ने दोबारा परीक्षा लेने की घोषणा की है. पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले की पड़ताल में जुटी हैं. इस सबके बीच विकी वाधवा नामक शख्स की बार-बार चर्चा हो रही है और क्वेश्चन पेपर लीक के लिए संदेह की सुई सबसे ज्यादा उसी की ओर घूम रही है. आइए जानते हैं विकी और पेपर लीक मामले में उसकी भूमिका के बारे में…

दसवीं कक्षा के मैथ्स की परीक्षा से पहले यानी 27 मार्च को सीबीएसई को एक ईमेल मिला जिसने क्वेश्चन पेपर लीक होने का दावा किया गया था. इसमें विकी के साथ दो स्कूलों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया था. विकी नई दिल्ली के राजिंदर नगर में कोचिंग सेंटर का मालिक है. यह पहली बार था जब इस मामले में विकी का नाम सामने आया था.

एएनआई के अनुसार 26 मार्च की शाम को सीबीएसई के एकेडमिक यूनिट को एक गुमनाम लिफाफा मिला, जिसमें बारहवीं कक्षा के इकोनॉमिक्स के क्वेश्चन पेपर का हल भेजा गया था. लिफाफे में चार पन्ने थे और सारे जवाब हाथ से लिखे थे. साथ ही, इसमें यह इशारा भी किया गया था कि क्वेश्चन पेपर लीक हो चुका है और व्हाट्सएप पर उपलब्ध है.

इसके बाद स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने 40 वर्षीय विकी से पूछताछ शुरू की. विकी ने पुलिस को बताया कि उसे भी व्हाट्सएप के जरिए ही क्वेश्चन पेपर मिला था. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विकी से सोमवार को पहली बार पूछताछ की गई थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले ओर उसे छोड़ दिया गया. हालांकि, उसे फिर से हिरासत में ले लिया गया है.

जानिए विकी के बारे में ये बातें:
1. 40 साल का विकी दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएट है. उसने 1996 में डिग्री हासिल की थी.
2. साल 1994 में उसने ओल्ड राजिंदर नगर में मैथ्स और साइंस के लिए कोचिंग सेंटर शुरू किया था. वह खुद भी छात्रों को मैथ्स और इकोनॉमिक्स पढ़ाता था.
3. विकी के स्टूडेंट्स कवेश्चन पेपर लीक में उसकी भूमिका से इंकार करते हैं.
4. विकी को पुलिस ने इस मामले का सरगना घोषित किया है ओर उसे हिरासत में ले लिया है.
5. सहयोगियों के साथ मिलकर विकी 10 से 15 हजार रुपए में क्वेश्चन पेपर बेचे.