नई दिल्ली. एससी/एसटी एक्ट पर हुए हालिया प्रदर्शनों के बाद विपक्ष के आरोपों से घिरी केंद्र सरकार वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले दलितों को भरोसे में लेने के लिए अब उनके घर तक पहुंचने की योजना बना रही है. इसके तहत सरकार दलितों के विकास के लिए केंद्र की विभिन्न योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए अब गांवों का रुख कर रही है. इसकी शुरुआत अंबेडकर जयंती के मौके पर होगी. सरकार देश के 486 जिलों के 21 हजार (21048) से ज्यादा गांवों में 1 हजार अफसरों की तैनाती करने जा रही है. ये गांव ऐसे होंगे जिनमें दलितों (एससी/एसटी) की आबादी ज्यादा होगी.

कैबिनेट सचिव ने तैयार किया है अभियान का ब्लूप्रिंट
ये अधिकारी केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगे. केंद्र सरकार की मंशा है कि उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, जन-धन, मिशन इंद्रधनुष और जीवन ज्योति बीमा योजना की तरह कम से कम सात योजनाओं को गांवों में सफलतापूर्वक लागू किया जाए. इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने विभिन्न विभागों के सचिवों और नीति आयोग के साथ मिलकर इस अभियान का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. 2011 की जनगणना के आधार पर जिन गांवों में एससी/एसटी की आबादी 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है, इन अफसरों की तैनाती उन्हीं गांवों में की जाएगी.

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दलितों को लुभाने, विपक्ष को धूल चटाने की कवायद
कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने बीते दिनों विज्ञान भवन में अधिकारियों को अंबेडकर जयंती के मौके पर शुरू किए जा रहे इस 22 दिवसीय लंबे अभियान के बारे में जानकारी दी. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि डिप्टी सेक्रेट्री रैंक का एक अधिकारी इस अभियान को नोडल ऑफिसर होगा. उसकी तैनाती देश के 26 राज्यों के संबंधित जिलों में की जाएगी. इन राज्यों में जम्मू-कश्मीर और केंद्रशासित प्रदेश पुड्डूचेरी भी शामिल है. वहीं चुनाव संबंधी आचार संहिता के कारण कर्नाटक और पश्चिम बंगाल को ग्राम स्वराज अभियान से अलग रखा गया है. अखबार के अनुसार, केंद्र का यह कदम 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दलित मुद्दे को लेकर हावी विपक्ष के लिए करारा प्रहार साबित हो सकता है.

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कम से कम 9 दिन गांवों में बिताएंगे अधिकारी
दलितों की आबादी वाले गांवों में अपने अभियान की सफलता के लिए केंद्र ने सभी संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दे दिए है. साथ ही अधिकारियों को भी दिशा-निर्देश दिया गया है. इस अभियान के तहत जिम्मेदार अधिकारी कम से कम 9 दिन संबंधित गांव में बिताएंगे ताकि योजना की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित हो सके. इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार कार्मिक मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेट्री पी.के. त्रिपाठी ने इस बाबत केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सचिवों को पत्र भेज दिया है. इस पत्र में कहा गया है, ‘नोडल ऑफिसर राज्य सरकारों के अधिकारियों व कलेक्टरों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि केंद्र सरकार की सभी सातों योजनाओं की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित की जा सके.

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी की गई तैनाती
यूपी के 70 जिलों में इस अभियान को लागू करने के लिए अफसरों की तैनाती कर दी गई है. प्रदेश के इन जिलों के 3 हजार 387 गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी चिह्नित की गई है. इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का भी गांव शामिल है. इसी तरह गुजरात के 17 जिलों के 96 गांवों में अफसरों की तैनाती की गई है, जो यहां की दलित और आदिवासी जनता के विकास के लिए जिम्मेदार होंगे.