नई दिल्ली: देशभर में रेप के दोषियों के लिए फांसी की मांग के बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत की अदालतों ने पिछले साल 2017 में 109 लोगों को मौत की सजा सुनाई, मगर एक भी व्यक्ति को फांसी नहीं दी गई. इसी तरह रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2016 में 136 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी जोकि 2017 में मौत की सजा पाने वालों के मुकाबले 27 कम है. मानवाधिकार संस्था ने गुरुवार को जारी ‘मृत्युदंड व सजा की तामील-2017’ रिपोर्ट में ये जानकारी दी.

संस्था ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन डेथ पेनल्टी के हवाले से बताया कि पिछले साल 51 हत्यारोपियों को मौत की सजा सुनाई गई है. यह संख्या 2016 के मुकाबले 87 कम है. यौन अपराध से संबंधित हत्या के आरोपों में 43 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि दो लोगों को नशीली दवाओं से संबंधित मामलों में मृत्यदंड का आदेश दिया गया है. रपट में कहा गया है कि संस्था प्राणदंड के मामलों पर रोजाना नजर रखती है.

भारत में मौत की सजा का सामना कर रहे लोगों की कुल तादाद 371 है. पिछली बार 2015 में भारत में याकूब मेमन को 1993 के मुंबई आतंकी हमले के लिए फांसी की सजा दी गई थी. वर्ष 1993 में मुंबई में बम विस्फोटों में 257 लोग मारे गए थे. एमनेस्टी इंटरनेशनल में कानून व नीति मामलों के वरिष्ठ निदेशक तवांडा मुतासाह ने संवाददाताओं को बताया कि 2018 के दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा मौत की सजा चीन में दी गई, जिसकी तादाद हजारों में है.

उन्होंने बताया कि चीन में मौत की सजा पाने वालों के सही आंकड़ों का पता नहीं चल पाया क्योंकि वहां इसे गुप्त रखा जाता है. इस मामले में दूसरा स्थान ईरान का है जहां 507 लोगों को मौत की सजा दी गई. तीसरे स्थान पर सऊदी अरब है, जहां 146 लोगों को मौत की सजा दी गई. इराक में 125 से अधिक लोगों को मौत की सजा मिली. वहीं पाकिस्तान में मृत्यदंड की सजा पाने वालों की संख्या 60 है.

अमेरिका में 23 लोगों को मौत की सजा दी गई. वहीं यूरोप में सिर्फ बेलारूस में दो लोगों को 2017 में मृत्युदंड दिया गया. मुतसाह ने बताया कि पिछले साल फांसी की सजा पाने वालों में चार फीसदी की कमी आई है, जबकि प्राणदंड की सजा सुनाए जाने के मामलों में 14 फीसदी कमी दर्ज की गई है.

(इनपुट: IANS)