नई दिल्ली। इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट के हाथों मारे गए 38 भारतीयों के अवशेष आज विमान से भारत लाए गए. परिजनों को मुआवजे के सवाल पर आज पत्रकारों के सवाल से विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह उखड़ गए. हाल ही में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में बताया था कि अगवा किए गए 39 भारतीय में से 38 की हत्या हो चुकी है. उन्होंने कहा था कि डीएएनए टेस्ट से 38 की मौत की पुष्टि हो गई है जबकि एक का डीएनए 60 फीसदी से ज्यादा मिलान कर गया. इसके बाद से ही इनके अवशेष भारत लाने की कोशिश तेज कर दी गई थी और इसकी जिम्मेदारी विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह को सौंपी गई थी.

मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजे के सवाल पर वीके सिंह उखड़ गए. पत्रकारों के सवाल के जवाब में वीके सिंह ने कहा, ये बिस्किट बांटने का काम नहीं है, ये आदमियों की जिंदगी का सवाल है, आ गई बात समझ में? मैं अभी ऐलान कहां से करूं? जेब में कोई पिटारा थोड़ी रखा हुआ है. ये कोई फुटबॉल का गेम नहीं है. केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह गंभीर है, विदेश मंत्रालय ने पीड़ित परिवारों से डिटेल्स मांगे हैं कि किसे नौकरी दी जा सकती है. हम समीक्षा करेंगे.

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वहीं, वीके सिंह से मिलने पहुंचे पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि मैं वीके सिंह का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने बहुत अच्छे से जिम्मेदारी निभाई है. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जिम्मेदारी लेंगे. 5 लाख रुपये हर परिवार को राज्य सरकार की तरफ से दिए जाएंगे. क्वालिफिकेशन के हिसाब से जॉब दिया जाएगा.

बता दें कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद को बताया था कि आईएस ने जून2 014 में इराक के मोसूल से 40 भारतीयों का अपहरण कर लिया था, लेकिन इनमें से एक खुद को बांग्लादेश का मुस्लिम बताकर भाग निकला था. उन्होंने कहा था कि बाकी 39 भारतीयों को बदूश ले जाया गया और उनकी हत्या कर दी गई. मारे गए कुछ लोगों के परिवारों ने 26 मार्च को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की थी. अब परिजनों को उचित मुआवजा देने की बात उठ रही है हालांकि अब तक सरकार की तरफ से आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.

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वीके सिंह ने कहा, ये मौका दुख का है, काफी कोशिश की कि इनका पता चले. इराक सरकार से मदद मिली है. इराक सरकार से मदद मिली है. मार्टियर फाउंडेशन के साथ उन्होंने बहुत जगह काम किया है. उन्होंने रात दिन काम करके हमें डीएनए मैच करके दिया. भारत सरकार की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई. मुझे 6-7 दिन लगे थे पता करने में. अक्टूबर में जो जानकारी जुलाई में हासिल की थी उसके आधार पर आगे की जानकारी ली गई.