नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार को ‘‘दलित विरोधी’’ करार देते हुए कहा कि बीजेपी के दलित सांसदों द्वारा अपनी ही पार्टी की आलोचना से उसका भांडाफोड़ हुआ है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में अपनी ‘‘ चुप्पी ’’ तोड़कर दलित सांसदों की चिंताओं का जवाब देने के लिए कहा. भाजपा के पांच दलित सांसदों के बयानों का जिक्र करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने दावा किया कि उन्होंने साबित कर दिया कि मोदी भारत को दलित मुक्त करने के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों की स्थिति को समझा जा सकता है जब सत्तारूढ़ दल के सांसद ही उनकी चिंताओं और डर को रेखांकित कर रहे हैं.

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मोदी के 2014 के चुनाव प्रचार ”चाय पे चर्चा” और उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात पर तंज किया. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को ऐसे क्रार्यक्रम करने से पहले अपनी पार्टी के दलित सांसदों की मन की बात जाननी चाहिए. उन्होंने दलितों पर ‘‘ बढ़ते अत्याचार’’ का जिक्र करते हुए कहा कि काम नहीं करने से स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि भाजपा के सांसद भी अब कह रहे हैं कि मोदी सरकार ने समुदाय के लिए कुछ नहीं किया है और इस सरकार में उनकी स्थिति खराब हुई है.

प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं दलित सांसद
इससे पहले उत्तर प्रदेश से बीजेपी यशवंत सिंह ने पीएम मोदी को अपनी चिट्ठी में लिखा, बीजेपी के दलित सांसद प्रताड़ना का शिकार बनते जा रहे हैं. वे कई मुद्दों पर जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कोशिश करके पलटवाए. उन्होंने बैकलॉग, प्रमोशन में आरक्षण और प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण की भी बात लिखी.

आरक्षण के कारण ही सांसद बने
उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा कि वह आरक्षण के कारण ही सासंद बन पाए हैं. लेकिन उनकी योग्यता का उपयोग नहीं हो पा रहा है. बता दें कि यशवंत सिंह जाटव समाज से आते हैं जो दलित कैटेगरी में आता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में 30 करोड़ की आबादी वाले दलित समाज के लिए प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी नहीं किया है.