दिल्ली: नेताओं के एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने का चुनाव आयोग ने समर्थन किया है. चुनाव आयोग ने कहा कि दो जगह से चुनाव लड़ना फिर एक सीट छोड़ देना मतदाताओं के साथ अन्याय है. सीट छोड़ने वाले नेता से ही दोबारा चुनाव का खर्च वसूला जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर चुनाव आयोग का हलफनामा
गौरतलब है कि भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दाखिल कर एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है. जिसके जवाब में कोर्ट में दाखिल हलफनामे में चुनाव आयोग ने एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने का समर्थन किया है और कहा है कि दो जगह से चुनाव लड़ना फिर एक जगह सीट को छोड़ देना मतदाताओं के साथ अन्याय है.
ऐसा लगभग हर पार्टी के नेता करते रहे हैं.

दो जगह से चुनाव लड़ना मतदाता के साथ अन्याय
एक से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने के बाद एक जगह की सीट छोड़ देने से वहां के मतदाता के साथ तो अन्याय होता ही है, जिसने पूरे विश्वास के साथ वोट दिया, साथ ही उस जगह पर दोबारा चुनाव कराने की भारी-भरकम जिम्मेदारी सरकार पर आ जाती है और एक बार फिर आम जनता के पैसों से पूरी कवायद फिर से शुरू की जाती है. उस जगह का पूरा प्रशासनिक अमला नए सिरे से चुनाव कराने में लग जाता है. जिससे समय और जनता के पैसे दोनों का दुरुपयोग होता है जिसके लिए कोई जवाबदेही तय नहीं की जाती.

जो सीट छोड़े वही चुनाव का खर्च भी उठाए
चुनाव आयोग ने कहा कि होना तो यही चाहिए कि जो व्यक्ति या पार्टी सीट छोड़े वही दोबारा चुनाव कराने का खर्च भी उठाए, जिससे इस तरह की कोशिशों पर रोक लग सके और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.

केंद्र की तरफ से अभी जवाब दाखिल नहीं
इस मामले में केंद्र ने जवाब दाखिल नहीं किया है जिससे मामले की सुनवाई जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है.