भोपाल: प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के दो सदस्यों को दो करोड़ रुपये की लूट के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक विशेष अदालत ने मणप्पुरम गोल्ड फायनेंस कंपनी की शाखा में लगभग दो करोड़ रूपये के सोने और नगदी की लूट के मामले में सिमी के दो सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

एनआईए के विशेष न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने लूट के एक मामले में सिमी के दो सदस्यों, 28 साल के मुंबई निवासी अबु फैजल और उज्जैन के रहने वाले 36 साल के मोहम्मद इकरार शेख को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

डकैती के इस मामले में कुल 8 लोग आरोपी थे. इनमें से 35 वर्षीय शरद सिंह और 44 वर्षीय शैलेन्द्र महतो फरार है जबकि सिमी के चार सदस्यों जाकिर हुसैन, शेख मुजीब अहमद, मोहम्मद असलम और मोहम्मद ऐजाउद्दीन की पुलिस मुठभेड में मौत हो चुकी है.

अभियुक्तों ने 23 अगस्त 2010 को भोपाल की हमीदिया रोड स्थित मणप्पुरम गोल्ड फायनेंस कंपनी की शाखा में डकैती को अंजाम देते हुए 1.46 करोड़ रूपये मूल्य का सोना और 41,000 नगद लूट लिए थे. सिमी संगठन हमेशा से विवादों में रहा है. इससे पहले नवंबर 2016 में भोपाल जेल से भागे सिमी के आठ संदिग्ध आतंकियों शेख मुजीब, खालिद, मजीद, अकील खिलजी, जाकिर, महबूब, अमजद और सलिख को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. हालांकि एनकाउंटर के बाद भोपाल पुलिस पर कई सवाल भी उठे थे.

क्या है सिमी ?

स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) एक प्रतिबंधित संगठन है, इसका गठन अप्रैल 1977 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में किया गया था. अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमलों के बाद भारत सरकार ने वर्ष 2001 में सिमी को आतंकी संगठन बताते हुए बैन कर दिया था. इस बैन के खिलाफ सिमी की तरफ से कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी. अगस्त 2008 में कुछ समय के लिए बैन को हटाया गया था लेकिन कुछ दिनों बाद ही फिर से इस संगठन को बैन कर दिया गया था.